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उद्योग जगत को मिलेगा नगर निगम बनने का लाभ

भले ही फिरोजाबाद की नगर पालिका को नगर निगम बनने का लाभ निकाय चुनाव के बाद मिल सकेगा, लेकिन इससे उद्योग जगत को लाभ मिलना तय है। उद्योगपतियों द्वारा भी इस पहल को लेकर खुशी जताई जा रही है।

वर्ष 2001 की जनगणना के अनुसार फिरोजाबाद की जनसंख्या 4 लाख 80 हजार 56 है। नगर निगम बनने के लिए तयशुदा सीमा पांच लाख होती है। अगर वर्ष 2001 के हिसाब से फिरोजाबाद नगर पालिका की जनसंख्या का अंदाजा लगाया जाए तो इस तयशुदा जनसंख्या को पार कर जाती है। इसलिए नगरपालिका को नगर निगम का दर्जा मिलना जरूरी था। इससे शहर के विकास के रास्ते खुल जाएंगे।


फिरोजाबाद एक औद्योगिक नगर के रूप में देशभर में विख्यात है। यहां बड़ी मात्र में मानव जनित श्रम होता है। कांच के उद्योग में कारीगरों द्वारा ही काम को अंजाम दिया जाता है जो कई कई हाथों से होकर गुजरने के बाद पूरा होता है। प्रतिदिन यहां फ्लोटिंग आवादी यानी शहर के अन्य हिस्सों से प्रतिदिन आना और काम करके वापस लौट जाना, इसका लोड भी संसाधनों को प्रभावित करता है। एक आंकड़े के अनुसार प्रतिदिन शहर की आवादी के अलावा करीब दो से ढाई लाख फ्लोटिंग आवादी का लोड नगरपालिका को संभालना पड़ता है। नगर निगम का दर्जा मिलते ही एक बड़ी आवादी को बेहतर संसाधन मुहैया हो जाएंगे। 
उद्यमियों से बातचीत और फोटो उनके नाम से- 
नगर निगम बनाने की जो कवायद शुरू हुई है, वह अच्छी है। कांच नगरी को विकास के नए आयाम मिलेंगे। कांच उद्योग और इससे जुड़े कर्मचारियों, श्रमिकों को भी लाभ मिलेगा। श्रमिकों की बेहतरी के रास्ते भी खुल जाएंगे।
-----देवी चरन अग्रवाल, उद्योगपति 

नगर निगम का दर्जा मिलने से शहर की शान बढ़ेगी। दायरा बढ़ेगा और जहां भी हम जाएंगे तो चुनिंदा नगर निगमों की गिनती होने से आसानी से आम आदमी की पहचान बनेगी। हालांकि सुहागनगरी के नाम से हर कोई फिरोजाबाद को जानता है। सुविधाएं बढ़ना लाजिमी है।
----अभिषेक मित्तल चंचल, उद्योगपति

नगर निगम बनाने की जो पहल शुरू हुई है, उसे काफी पहले शुरू होकर अब तक मूर्त रूप होना चाहिए था। लेकिन देरी से सही, इस पहल की जितनी प्रशंसा की जाए, कम है। उद्योग जगत के लिए यह खुशखबरी के समान है।
------प्रदीप गुप्ता, उद्योगपति

नगर निगम बनने के बाद आएदिन ग्रांट का रोना रोने वाले कर्मचारियों को लाभ मिलना चाहिए। कांच नगरी का अपना नाम है, कर्मचारियों की संख्या बढ़ जाएगी और सफाई आदि व्यवस्थाएं दुरुस्त होने से शहर को चमन बनने में देरी नहीं लगेगी।
----पीके जिंदल, उद्योगपति

नगर निगम का दर्जा मिलना हमारे लिए तोहफे से कम नहीं है। औद्योगिक क्षेत्रों में भी विकास तेजी से होगा। कई ऐसे काम जो रुके पड़े हैं, पूरे हो जाएंगे। ग्रांट बढ़ेगी तो शहर को लाभ ही होंगे।
-----मोहन अग्रवाल, उद्योगपति

आबादी के हिसाब से नगर निगम का दर्जा देरी से मिल रहा है, लेकिन नेक काम जितनी जल्दी हो जाए, उतना ही अच्छा रहता है। नगर निगम बनने के बाद गंदगी की समस्या से निजात मिल जाएगी।
----इस्लाम, उद्योगपति

नगर निगम बनने के बाद शहर का नक्शा ही चेंज हो जाएगा। विकास के रास्ते खुलेंगे। नई आवादी के लोगों को भी समस्याओं से निजात मिल जाएगी। यानी लोगों की समस्याएं तेजी से हल होंगी।
-----हनुमान प्रसाद, उद्योगपति

नगर निगम बनने के बाद शहर को नया लुक दिया जाए। जाम की समस्या, ट्रांसपोर्ट नगर की की स्थापना आदि तेजी से हल हो जाएंगीं। इतना ही नहीं, धनराशि का आवंटन बड़े स्तर पर होगा तो फिर लोगों को सहूलियतें मिलना तय है।
-----चक्रेश जैन, उद्योगपति

नगर निगम बनने के बाद आगरा की तरह महानगर का दर्जा भी मिल जाएगा। शैक्षिक माहौल भी वृहद रूप लेगा। सुख सुविधाओं के साथ साथ लोगों को अन्य सहूलियतें भी महानगरों की भांति मिलेंगीं।
----मुकेश बंसल, उद्योगपति

नगर निगम बनने के बाद शहर की दशा और दिशा दोनों में बदलाब आएगा। सड़कों, संपर्क मार्गो की खस्ताहालत सुधरेगी। गंदगी से निजात मिलेगी। समस्याओं के हल होने में तेजी आएगी। इससे उद्योग जगत को लाभ मिलेगा।
------धर्मेद्र मोहन गुप्ता, उद्योगपति

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