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मथुरा को नगर निगम के दर्जे के लिए शुरु हुई कवायद

 

प्रदेश की अखिलेश यादव सरकार ने सत्ता सम्भालते ही मथुरा को नगर निगम बनाने की दिशा में तैयारी शुरू कर दी थी। यही कारण है कि नये वित्तीय साल की शुरूआत से पहले ही मथुरा और वृंदावन नगर पालिकाओं के सीमा विस्तार की रिपोर्ट शासन ने तलब कर ली थी। प्रशासन अब उन गांवों पर डोरे डालने की कोशिश कर रहा है, जो पालिका सीमा में शामिल नहीं होना चाहते।  

वैसे तो शासन काफी दिनों से मथुरा और वृंदावन नगर पालिका परिषदों के सीमा विस्तार की प्रक्रिया चला रखी थी। इस प्रक्रिया के पीछे गांवों के विकास कार्य की मंशा है। नगर पालिकाओं के आय के संसाधन बढ़ाने की दिशा में भी इस प्रक्रिया को किया जा रहा है। इसके चलते शासन ने नगर विकास विभाग को सीमावृद्धि के निर्देश दिये थे। इसको लेकर नगर विकास विभाग ने जिला पंचायत राज विभाग को पालिका की सीमावृद्धि के लिये सीमावर्ती ग्राम पंचायतों के प्रधानों से पालिका में शामिल होने का प्रस्ताव मांगा था। इसको लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी योगेन्द्र कटियार ने मथुरा नगर पालिका की सीमावर्ती 37 ग्राम पंचायत व वृन्दावन नगर पालिका के सीमावर्ती 17 ग्राम पंचायतों को शामिल होने के लिये सहमति मांगी। इनमें से 12 ग्राम प्रधानों ने पालिका में शामिल होने के लिये सहमति जताई। जबकि 22 ग्राम पंचायतों ने असहमति जताई थी। इनमें तीन ग्राम पंचायतें पूर्व से ही पालिका में शामिल हैं। वहीं वृन्दावन पालिका के 17 ग्राम पंचायतों में से केवल एक गांव तेहरा ने पालिका में शामिल होने पर सहमति जतायी है चार गांव पहले से ही पालिका में शामिल हैं, जबकि 12 ग्राम पंचायतों के प्रधानों ने पालिका में शामिल होने से असहमति जताई। 

इस प्रक्रिया की रिपोर्ट पिछले दिनों ही डीपीआरओ योगेन्द्र कटियार ने शासन को भेज दी थी, लेकिन अब मथुरा को नगर निगम बनाने की दिशा में फिर से शासन में कसरत तेज होने से विगत दिनों प्रशासन के स्तर से भेजी गई रिपोर्ट को नगर निगम बनने के नजरिये से देखा जा रहा है। उधर शासन की मंशा भांप कर प्रशासन उन गांवों के प्रधानों और ग्रामीणों पर डोरा डालने में लगा है जो नगर पालिका के सीमा विस्तार से सहमत नहीं हैं। उन्हें नगर निगम के फायदे गिनाए जा रहे हैं।    

मथुरा के ये गांव हैं असहमत
मथुरा नगर पालिका के सीमावर्ती गांवों के प्रधानों ने अपनी पालिका में शामिल होने पर असहमति जतायी है। इनमें रांची बांगर, रांची खादर, आजमपुर,नवादा, तंतूरा, विर्जापुर, महोली, पालीखेड़ुा, बाकलपुर, गनेशरा, सलेमपुर, गिरधरपुर, ईशापुर, लोहवन, सतोहा, शाहपुर गौसना,कोटा,मथुरा बांगर (देहात क्षेत्र), सादौला, नगला अमरा, तैयापुर, रायपुरमई आदि गांवों के प्रधानों ने शामिल होने से असहमति जतायी है।        

वृन्दावन के ये गांव असहमत
वृन्दावन नगर पालिका में शामिल होने के लिये सीमावर्ती ग्राम पंचायतों से मांगे गये प्रस्ताव के सापेक्ष जैंत,छटीकरा, सुनरख बांगर, सुनरख खादर, आटस बांगर, आटस खादर, राजपुर बांगर, राजपुर खादर, धौरेरा बांगर,धौरेरा खादर,अल्हैपुर, किनारई आदि गांवों के प्रधानों ने पालिका में शामिल होने से अहसमति जता अपना प्रस्ताव भेज दिया है।   

..सफलता तो नहीं निगम बनने के पीछे
मथुरा। हाल ही में सम्पन्न प्रदेश विधान सभा चुनाव में पहली बार मथुरा-वृंदावन सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में डॉ. अशोक अग्रवाल को करीब 53 हजार वोट मिला है। इसे सपा अपना बढ़ता जनाधार मान रही है। ऐसे में आगामी समय में होने वाले स्थानीय निकायों के चुनाव में सपा अपनी ताकत का एहसास कराने की पूरी कोशिश में रहेगी। मथुरा में भी अपना पलड़ा भारी रखने के लिए सपा मथुरा को नगर निगम बनाकर तोहफा देने चाह रही है।

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  • Web Title:नगर निगम के दर्जे के लिए शुरु हुई कवायद