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जोरदार आवाज के साथ चीख पुकार शुरू

रात के साढ़े ग्यारह बजे थे। कुछ लोग काम में लगे थे। कुछ खाना खा रहे थे। कुछ सोने की तैयारी में थे। शहर और आद्यौगिक क्षेत्र का यह हिस्सा भी धीरे-धीरे रात के अंधेरे में वीरान हो रहा था। सब कुछ सामान्य तरीके से चल रहा था कि एक जोर की आवाज आयी और सब कुछ तबाह हो गया।

लोगों की चीख पुकार सुनाई देने लगी। आसपास के लोगों को पता भी नहीं चला कि क्या हुआ। बाद में लोगों ने देखा तो तीन मंजिली इमारत जमींदोज हो चुकी थी और उसमें फंसे लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे।

यह किसी कहानी या उपन्यास का हिस्सा नहीं बल्कि रविवार देर रात जालंधर में कंबल बनाने वाली एक कारखाने के तीन मंजिली इमारत गिरने के समय का दृश्य है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही इमारत गिरी, जोरदार आवाज हुई। ऐसा लगा मानो कोई विस्फोट हुआ।

आसपास की इकाईयों में काम कर रहे श्रमिक उस ओर भागे। जिस कारखाने की इमारत गिरी थी उसकी दूसरी इकाईयों में काम करने वाले लोग भी उस ओर दौड़े। उन्होंने बताया कि हर तरफ केवल चीख पुकार मची हुई थी। मलबे में दबे लोग बचाने की गुहार लगा रहे थे। वह पानी मांग रहे थे।

सोमवार तड़के तक आवाज आती रही। जैसे जैसे दिन चढ़ा आवाज धीमी होती चली गयी। बिहार के पटना जिले के निवासी मंजीत कुमार ने कहा कि मेरा भाई और एक अन्य रिश्तेदार मलबे में दबे हुए हैं। सुबह सवा पांच बजे उसके रिश्तेदार का अंतिम बार फोन आया था। उसके बाद से कोई बातचीत नहीं हो पायी है।

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