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सरप्राइज गिफ्ट

आर्यन आठवीं कक्षा में पढ़ता था। वह पढ़ाई में बहुत होशियार था। क्लास में सभी बच्चे उसे पसंद करते थे और उससे अपनी प्राब्लम्स का सॉल्यूशन पूछते थे। आर्यन सभी की खुशी-खुशी हेल्प करता था। वैसे तो सभी उसके अच्छे दोस्त थे, लेकिन अंश उसका बेस्ट फ्रेंड था। अंश भी पढ़ने में बेहद होशियार था। दोनों ही कक्षा में हमेशा फस्र्ट और सेकेंड आते थे। अंश पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद में भी आगे रहता था ।

आर्यन और अंश दोनों सुबह इकट्ठे स्कूल आते थे और वापसी में भी साथ होते थे। दोनों के घर भी आसपास थे। दोनों की फैमिली एक-दूसरी को जानती थीं और अक्सर त्योहारों व पारिवारिक समारोह में सभी मिलते रहते थे। एक दिन आर्यन और अंश बगीचे में खेल रहे थे। खेल के दौरान अचानक अंश ने पिच्च से बगीचे में थूक दिया। यह देखकर आर्यन गुस्से से अंश से बोला, ‘अंश, तुमने फिर मेरे सामने थूका। मैंने तुमसे कितनी बार कहा है कि मुझे तुम्हारा एक-एक मिनट में रास्ते में वो भी साफ-सुथरी जगहों पर थूकना बिल्कुल पसंद नहीं है, लेकिन फिर भी तुम मेरी बात नहीं मानते।’ इस पर अंश बोला, ‘यार मैं क्या करूं? मैं चाहने पर भी स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाता और इधर-उधर थूक देता हूं। ऐसा कब हो जाता है मुझे खुद भी इस बात का एहसास थूकने के बाद होता है।’

आर्यन को अंश की सभी बातें पसंद थीं, सिवाय इस बात के कि वह कहीं पर भी थूक देता था। वह ऐसे स्थानों पर भी थूकने से बाज नहीं आता था, जहां पर गंदगी न फैलाने का अनुरोध होता था। आर्यन हर बार अंश को थूकने पर टोकता था। उस समय अंश को अपनी गलती का एहसास होता था, लेकिन अगले ही पल वह भूलकर फिर से थूकना शुरू कर देता था।

एक दिन बातों-बातों में आर्यन अंश से बोला, ‘अंश तुम्हारा बर्थ डे आ रहा है। कुछ सोचा है कि इस बार कैसे मनाओगे?’ उसकी बात सुनकर अंश बोला, ‘हां यार, इस बार तो मैं बर्थडे को लेकर बहुत उत्साहित हूं। सोच रहा हूं कि कैसे मनाऊं। पर तेरा भी तो बर्थडे आ रहा है। हम दोनों का तो अगले महीने में ही बर्थडे होता है न।’ आर्यन बोला, ‘इस जन्मदिन पर मुझे क्या तोहफा दोगे? कुछ सोचा है या सोच रहे हो।’ अंश बोला, ‘अभी सोचा तो नहीं है, लेकिन इस बार भी हर बार की तरह सरप्राइज गिफ्ट दूंगा।’

अंश ने गिफ्ट देने का प्रॉमिस तो किया पर उसे समझ नहीं आ रहा था कि वह तोहफे में आर्यन को क्या दे? काफी देर तक वह इसी पर विचार करता रहा। कुछ देर विचार करने के बाद अचानक उसके चेहरे पर रौनक आई और वह खिल उठा।

अगले दिन संडे था। सुबह आर्यन और अंश कुछ गरीब बच्चों को कपड़े व पुस्तकें बांटने गए। ये बच्चे उन्हें अक्सर उस समय मिलते थे, जब दोनों दोस्त खेलने के लिए पार्क में आते थे। दोनों ने अपने घरों में जब इन बच्चों की हालत के बारे में बताया तो उनके माता-पिता ने बच्चों के कुछ पुराने कपड़ों के साथ ही कॉपी-किताबें व खाने की चीजें भी बांटने के लिए दे दी थीं ।

कपड़े और पुस्तकें बांटने के बाद आर्यन और अंश घर को चल दिए। दोनों पैदल जा रहे थे। उस दिन आर्यन को अंश के व्यवहार में कुछ परिवर्तन नजर आया। जब उससे नहीं रहा गया तो वह बोल ही पड़ा, ‘अंश, आज मेरे साथ तुम ही हो न, तुम्हारे रूप में कोई और तो नहीं है।’ इस पर अंश मुस्कराते हुए बोला, ‘अरे भई, मैं अंश ही हूं।’ यह सुनकर आर्यन बोला, ‘आज तुम्हें थूकने की तलब नहीं हो रही।’ अंश मुस्करा कर बोला, ‘मैंने अपनी इस बुरी आदत पर काबू पा लिया है और तुम्हारे जन्मदिन पर तुम्हें सरप्राइज गिफ्ट दिया है।’ यह सुनकर आर्यन, अंश को देखता रहा और बोला, ‘पर यह कमाल हुआ कैसे? मैं तो लाख चाहने पर भी तुमसे इस आदत को नहीं छुड़ा पाया फिर तुमने बिना मुझे बताए इस आदत को कैसे छोड़ा?’ अंश बोला, ‘मत पूछ यार, इस बुरी आदत को छोड़ने के लिए मुझे कितने पापड़ बेलने पड़े। पहले मैंने सोचा कि जब मैं बाहर बार-बार थूकता हूं तो घर में क्यों नहीं? यह सोचकर मैंने घर में जगह-जगह यह लिख दिया कि घर मेरा अपना है और मुझे यहां कहीं भी थूकने का अधिकार है। यह लिखने पर भी मेरे दिमाग ने मुझे घर में थूकने की इजाजत नहीं दी। फिर मैंने सोचा कि घर गंदा होगा, जब मेरे दिमाग को यह पता है तो बाग-बगीचे और साफ स्थानों पर थूकने से वे भी गंदे होते हैं, मुझे इस बात को भी दिमाग में बैठा लेना चाहिए। कड़े प्रयत्न के बाद मैं अपनी इस कोशिश में कामयाब हो गया और आज तुम्हारे सामने हूं।’

अंश की बात सुनकर आर्यन बहुत खुश हुआ और उसे गले से लगाते हुए बोला, ‘हां दोस्त, इससे बड़ा सरप्राइज गिफ्ट तो मेरे लिए हो ही नहीं सकता था। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलाना, चाहे वह पान की पीक हो, फलों के छिलके हों, थूकना हो, बहुत गलत बात है और इन स्थानों पर गंदगी को फैलने से तभी रोका जा सकता है जब सबके मन में यह भावना हो कि सार्वजनिक स्थान, जैसे बगीचे, पार्क, सड़क, स्कूल आदि सभी हमारे लिए घर के समान ही हैं और इन पर गंदगी फैलाने का अर्थ है अपने देश के घर को गंदा करना।’ आर्यन की बातें सुनकर अंश बोला, ‘बस कर यार, बहुत लेक्चर दे दिया। चल अब शाम की पार्टी की तैयारी करें।’ अंश की बात सुनकर आर्यन मुस्कराकर घर की ओर चल दिया।

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