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बोधगया में 'संकरान' पर्व की धूम

हिंदू मान्यता के अनुसार जैसे नव वर्ष की शुरुआत चैत्र महीने से होती है, कुछ इसी तरह थाईलैंड में नव वर्ष का आगमन 14 अप्रैल से माना जाता है जिसे थाईलैंडवासी 'संकरान' कहते हैं। इसे तीन दिनों तक मनाया जाता है। इस दौरान सभी थाईवासी एक दूसरे पर पानी फेंक कर खुशी का इजहार करते हैं। प्रसिद्ध पर्यटक स्थल बोधगया में भी रविवार को 'संकरान' पर्व की शुरुआत हुई।

बौद्ध धर्मावलंबियों के धार्मिक स्थल बोधगया में थाई मंदिर परिसर में थाईलैंड के पर्यटक दल ने नव वर्ष के आगमन के मौके पर अपना पारम्परिक 'संकरान' त्योहार मनाना आरम्भ किया। थाईलैंड से एक पर्यटक दल खासतौर पर यह पर्व मनाने बोधगया आया है।

एक थाई पर्यटक ने बताया कि थाईलैंड में परम्परा के अनुसार इस दिन नव वर्ष के आगमन को लेकर लोग खुशी मनाते हैं। थाई परम्परा के अनुसार त्योहार के दौरान लोग सबसे पहले धर्मगुरु के पास पहुंचते हैं जहां बाल्टी में पानी रखा जाता है। इस पानी में फूल-इत्र और अन्य द्रव्यों को डाल दिया जाता है। 

इसके बाद मंत्रोच्चार के साथ बौद्ध गुरु इसका शुद्धीकरण करते हैं और फिर लोग शुद्ध किए हुए जल को बौद्ध गुरु के हाथ में देते हैं। सबसे पहले गुरु जी उस पानी को लोगों पर छिड़ककर अशीर्वाद देते हैं और इसके बाद शुरू हो जाता है 'संकरान' त्योहार।

थाई लोग एक-दूसरे पर पानी की बौछार कर नव-वर्ष के आगमन का स्वागत करते हैं। पानी फेंक कर खुशी मनाने के पर्व में महिला, पुरुष व बच्चों सामूहिक रूप से शामिल होते हैं।

बौद्ध लामा चकमा मॉनेस्ट्री के प्रियपाल भंते ने बताया कि भारत में जिस तरह होली मनाई जाती है वैसे ही थाईवासी 'संकरान' मनाते हैं। बस अंतर यह होता है कि होली को रंगों का त्योहार कहा जाता है जबकि 'संकरान' में रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

उन्होंने बताया कि बोधगया और राजगीर में थाईवासी प्रतिवर्ष 'संकरान' मनाने आते हैं। यहां बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी 'संकरान' का आनंद उठा रहे हैं।

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