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दूर नहीं हो रही बाल श्रमिकों की समस्या

हिन्दुस्तान प्रतिनिधि पटना। बाल श्रम उन्मूलन के क्षेत्र में राज्य सरकार, केन्द्र सरकार के साथ-साथ कई स्वयंसेवी संस्था की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। पर स्थिति यह है कि अभी भी प्रदेश बाल श्रम से मुक्त नहीं हो पाया है। आंकड़े बताते हैं कि श्रम संसाधन विभाग की ओर गठित धावा दल ने पिछले चार-पांच वर्षो में होटलों, ढाबों एवं घरों से लगभग 6000 से अधिक बाल श्रमिकों को मुक्त कराया गया है।

केवल पटना में लगभग 2500 के अधिक बाल श्रमिक पटना से मुक्त कराए गए हैं। पर अन्य विभाग इस जिम्मेवार को नहीं निभा पा रहे हैं। वास्तविक स्थिति यह है कि पुनर्वास की व्यवस्था ठीक ढंग से नहीं होने के कारण बच्चों पुन: विभिन्न होटलों एवं ढाबों में पहुंच जा रहे हैं।

जानकारों का कहना है कि बाल श्रम उन्मूलन विमुक्ति एवं पुनर्वास के लिए राज्य कार्यबल (टास्क फोर्स) का गठन कर 19 विभागों को जो जिम्मेवारी मिली है उसे श्रम विभाग को छोड़कर अन्य विभाग नहीं निभा रही है।

लगभग तीन साल पहले बाल श्रम उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास के लिए प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर कार्य बल का गठन किया गया है। इसमें राज्य सरकार के19 विभाग एवं राज्य प्रतिनिधि के रूप में तीन संगठनों को टास्क फोर्स के लिए सदस्य बनाया गया है।

राज्य कार्यबल का मुख्य काम राज्य कार्य योजना का अनुश्रवण करना है। साथ ही बाल श्रमिकों की विमुक्ति, पुनर्वास तथा उनके परिवारों की गरीबी को दूर करने के लिए उपाय भी बताना भी है।

‘बाल श्रम उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास के लिए कार्य बल का जो गठन किया है उसे श्रम विभाग तो निभा रहा है पर विमुक्ति के बाद अन्य विभागों को जो जिम्मेवारी दी गई है उसे वे निभा नहीं रहे हैं। हाल ही में मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक में इस बात पर चर्चा भी हुई है।’ रामदेव प्रसाद, अध्यक्ष, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोगं

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