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मंडलीय जेल में बंदी एक हजार और डॉक्टर बस एक

मंडलीय जेल अस्पताल की व्यवस्था में खामियां ही खामियां हैं। जेल में बंद एक हजार पुरुष बंदियों के इलाज की जिम्मेदारी इन दिनों सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर पर है। वह भी जेल में नहीं रहते हैं। बंदियों की तबीयत खराब होने पर उन्हें फोन करके बुलाना पड़ता है। इससे समय पर बंदियों को इलाज नहीं मिल पाता। महिला बंदियों के इलाज के लिए जेल में महिला डॉक्टर ही नहीं है। यहां की करीब 50 महिला बंदियों को इलाज के लिए महिला अस्पताल लाना पड़ता है। अभी हाल में ही गर्भवती महिला बंदी को दर्द उठने पर महिला अस्पताल लाना पड़ा था। अगर महिला डॉक्टर होती तो उसका इलाज जेल में ही संभव हो जाता।
शासन ने हाल ही में फरमान जारी किया है कि जेल में बीमार बंदियों के इलाज पर विशेष ध्यान दिया जाए। लेकिन गोरखपुर जेल का हाल इससे उलट है। जेल में 20 बिस्तरों वाला एक मिनी अस्पताल है, जहां सिर्फ एक बाल रोग विशेषज्ञ तैनात किया गया है। हालांकि यहां के लिए एक वरिष्ठ मेडिकल ऑफिसर, एक मेडिकल ऑफिसर व तीन फार्मासिस्टों की नियुक्ति का शासनादेश है। वर्तमान में यहां एक मेडिकल ऑफिसर और दो फार्मासिस्ट ही ड्यूटी कर रहे हैं।
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पांच बार पत्र लिख चुका है जेल प्रशासन
जेल प्रशासन चाहता है कि अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की पर्याप्त संख्या मौजूद रहे और इलाज की हर वक्त व्यवस्था रहे। इसके लिए सीएमओ को पांच बार पत्र भी लिखा गया है। जेल प्रशासन जेल अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती पर भी आपत्ति दर्ज करा चुका है।
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प्राथमिक उपचार के संसाधन मौजूद
जेल में बंदियों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए एक प्राथमिक उपचार केन्द्र पहले से ही है। इस केन्द्र में उपचार की हर संभावित संसाधन उपलब्घ है लेकिन सिर्फ डॉक्टर की कमी के कारण व्यवस्था बदहाल है। इस केन्द्र पर दो फार्मासिस्ट हैं, जो बंदियों का इलाज करते हैं।
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स्वास्थ्य संबंधी समस्या को लेकर पांच बार सीएमओ को पत्र लिख चुका हूं। एक ही डॉक्टर के जिम्मे एक हजार बंदियों की स्वास्थ्य सुरक्षा की जिम्मेदारी है। एक डॉक्टर की तैनाती होने के कारण बंदियों के इलाज के लिए अक्सर जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का सहारा लेना पड़ता है।
आरके शर्मा, जेल अधीक्षक, गोरखपुर मंडलीय जेल
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शासन के पास डॉक्टर की नियुक्ति का प्रस्ताव भेजा गया है। उम्मीद है कि जल्द ही संस्तुति हो जाए। जैसे ही संस्तुति हो जाएगी वैसे ही एक और डॉक्टर की तैनाती कर दी जाएगी।
डॉ. आरएन मिश्र, सीएमओ, गोरखपुर

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