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युवा इंजीनियर ने की खुदकुशी

युवा इंजीनियर विवेक रंजन उर्फ बाबू ने खुदकुशी कर ली। रविवार की सुबह देर तक जब विवेक कमरे से बाहर नहीं निकला तो माता-पिता ने दरवाजा खटखटाया। काफी देर तक जवाब नहीं मिला, तो उन लोगों ने वेंटिलेशन से झांका, तो सभी दंग रह गये। विवेक का शव पंखे से लटक रहा था। यह घटना राजाबाजार इलाके में मछली गली के समीप चाणक्यपुरी कॉलोनी स्थित अशोक विहार अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 202 में हुई। पुलिस के मुताबिक खुदकुशी का कारण अभी स्पष्ट नहीं हैं।

इंजीनियरिंग करके बेंगलुरु व चेन्नई में कुछ समय तक नौकरी करने के बाद विवेक प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए वापस पटना आ गया था। वह यहां अपने परिवार के साथ ही अपार्टमेंट में रहता था। विवेक के चाचा उपेन्द्र वर्मा ने बताया कि शनिवार की सुबह विवेक जिम गया था। शाम को देर लौटने पर मां ने वजह पूछी थी।

थोड़ी देर बाद खाना-पीना खाकर विवेक अपने कमरे में चला गया और अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। रात में पिता राजीव रंजन जब घर पहुंचे तो विवेक को तलाशने लगे। फिर उन्होंने दरवाजा खटखटाया पर नहीं खुला। तब वे यह सोच कर सोने चले गये कि विवेक सो गया होगा। पर होनी को कुछ और ही मंजूर था। सुबह जब कमरे का दरवाजा खुला तो विवेक का शव निकाला गया।

मौके से सुसाइड नोट या कोई अन्य संदिग्ध सामान मिलने से इनकार करते हुए शास्त्रीनगर थानाध्यक्ष राजीव कुमार सिंह ने बताया कि घटना के बाबत थाने में अप्राकृतिक मौत का मामला (यूडी केस) दर्ज किया गया है।

जिम से जुड़े तार!
विवेक की खुदकुशी के तार कहीं उस जिम से तो नहीं जुड़े हैं जहां वह नियमित रूप से आता-जाता था? स्थानीय लोगों के बीच इस पहलू पर कई तरह की चर्चा है। क्या जिम में हुई किसी घटना के बाद तनाव में विवेक ने आत्मघाती कदम उठाया? सुबह में वह जिम गया पर शाम में क्यों लौटा? समेत कई सवालों पर सस्पेंस बरकरार है। शास्त्रीनगर थानाध्यक्ष के मुताबिक परिजन सदमें में है और अभी कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं है। पुलिस की तफ्तीश पूरी होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।  

इकलौता बेटा था विवेक
होनहार इंजीनियर विवेक अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था। सिविल सर्विसेज व अन्य प्रतियोगिता परीक्षाओं में वह सफल होकर घरवालों के अरमान पूरे करना चाहता था। पर तकदीर को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के बेहतर कॅरियर और शादी को लेकर माता-पिता ने सपने संजोये थे अब उसी की अर्थी आंखों के सामने से निकली। जिसने भी यह दर्दनाक दृश्य देखा उसकी आंखें भर आईं।       

‘बाबू’ तूने ये क्या किया..
शनिवार तक राजीव रंजन की गृहस्थी हंसी-खुशी से चल रही थी। पर अचानक तकदीर ने क्रूर सितम ढाते हुए ताजिंदगी सिसकने को मजबूर कर दिया। देखते ही देखते जिगर के टुकड़े की जिंदगी ही समाप्त हो गई। बेटे के शव को देख रोते-चीखते मां बेहोश होने लगी। जब होश आता तो आंखों से आंसू और मुंह से इतना ही निकलता ‘बाबू, तूने ये क्या किया बेटा..क्यों हमें छोड़ दिया।’ मात-पिता व अन्य परिजन विवेक को घर में दुलार से ‘बाबू’ कह कर पुकारते थे। विवेक के पिता राजीव रंजन पटना से बाहर प्राइवेट नौकरी करते हैं।

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