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राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में फर्जीवाड़ा, डॉक्टर शिकंजे में

राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बसंतपुर बाजार में संचालित एक नर्सिग होम में करीब एक साल से चल रहे फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ शनिवार की देर शाम उस समय हुआ, जब मामले की जांच करने पहुंची टीम ने फर्जी डॉक्टर आरके अमन को पकड़ कर पुलिस के हवाले कर दिया।

इस बीच दूसरा फर्जी आई स्पेशलिस्ट डॉक्टर एसके ठाकुर भाग निकला। आरोपित डॉक्टर सारण जिले के बनियापुर थाने के नरहरपुर का रहने वाला है। नर्सिंग होम के कई कागजातों को भी सील कर दिया गया। दोनों फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सीएस डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने बसंतपुर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है।

बसंतपुर बाजार में राजमहल लाइफ केयर नर्सिंग होम में आंख से संबंधित बीमारी की जांच पिछले एक साल से की जा रही है। इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन जांच देश के कुछ ही अस्पतालों में होती है। इस नर्सिग होम में भी इस जांच की सुविधा उपलब्ध थी। एक साल के दौरान यहां पर 184 मरीजों की जांच की गई।

नर्सिंग होम संचालक ने बीमा कंपनी आईसीआईसीआई लोम्वार्ड को 184 मरीजों की सूची सौंप 14 लाख रुपए के बीमा भुगतान का दावा किया। जबकि बीमा कंपनी पचास फीसदी राशि का भुगतान पहले ही कर चुकी है। नर्सिग होम का रजिस्ट्रेशन राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत किया गया है।

इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन की इतने बड़े पैमाने पर जांच को लेकर बीमा कंपनी को संदेह हुआ। कम्पनी ने फर्जी जांच की आशंका जताते हुए डीएम लोकेश कुमार सिंह से जांच कराने का अनुरोध किया। डीएम ने सीएस डॉ. चन्द्रशेखर कुमार के नेतृत्व में जांच टीम का गठन एक पखवारा पहले ही किया था।

शनिवार की देर शाम जब जांच टीम बसंपतुर पहुंची तो बसंतपुर के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील कुमार सिंह भी मौजूद थे। मरीजों की जांच की सूची देख नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एलबी चौधरी भौचक रह गए। उन्होंने दावा किया कि इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन जांच यहां होने की बात पूरी तरह फर्जीवाड़ा है।

वहीं नर्सिग होम के फिजिशियन डॉ. आरके अमन से जब एमबीबीएस का सर्टिफिकेट मांगा गया तो वह सर्टिफिकेट नहीं दे पाए। उनसे एमबीबीएस के सभी सब्जेक्ट्स लिखने को कहा गया तो गलत लिख बैठे। इस पर सीएस ने फर्जी डॉक्टर को पुलिस को सुपुर्द कर दिया। जबकि कथित नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके ठाकुर फरार हो गए। कर्मचारी भी भाग निकले। इधर नर्सिंग होम संचालक एजाज अली जांच टीम के सामने नहीं आए। 

क्या है मामला
आंख के गोलार्ध के दबाव को कम करने की जांच को इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन कहा जाता है। इसके लिए मशीन से नाक के रास्ते पाइप लगाकर इंडोस्कोपी विधि से गोलार्ध के प्रेशर को कम किया जाता है। जांच टीम के सदस्य व नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. एलबी चौधरी ने बताया कि इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन जांच राज्य के किसी भी अस्पताल में नहीं होती है। लेकिन बसंतपुर जैसी छोटी जगह पर फर्जी डॉक्टर ने यह जांच कैसे की यह समझ से बिल्कुल परे है।

क्यों हुआ फर्जीवाड़ा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बीपीएल परिवार के स्मार्टकार्ड धारकों का चिन्हित अस्पतालों में तीस हजार रुपये तक का मुफ्त इलाज होना है। इसी योजना के तहत नर्सिग होम संचालक ने 184 मरीजों की जांच दिखा बीमा की राशि का दावा किया। नर्सिग होम संचालक ने इलाज व डॉक्टर पर खर्च दिखाकर बीमा राशि का दावा किया।

क्या कहते हैं सीएस
सीएस डॉ. चन्द्रशेखर कुमार ने कहा कि 184 मरीजों की इंडोस्कोपी ऑप्टिकल ऑरबिट डिकोमप्रेशन जांच के एवज में बीमा की राशि के भुगतान के लिए नर्सिंग होम संचालक ने दावा किया था। बीमा कम्पनी ने फर्जीवाड़ा की आशंका जताई थी। डीएम के निर्देश पर टीम गठित कर जांच की गई और  फर्जी डॉक्टर को गिरफ्तार किया गया है।

नर्सिग होम संचालक की सफाई
नर्सिंग होम के संचालक एजाज अली ने कहा कि डॉक्टर फर्जी नहीं हैं। अन्य कई डॉक्टर भी इलाज करते हैं। जो जांच हुई है वह सही है। नर्सिग होम में इस जांच की सुविधा है। संबंधित जांच पिछले एक साल से हो रही है। बीमा कम्पनी के डॉक्टर आकर बीच-बीच में ऑडिट करते हैं। उन्होंने कभी सवाल खड़े नहीं किए। जांच के दौरान सभी कर्मचारी मौजूद थे। फरार होने की बात गलत है।

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