DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सूर्य से नहीं जन्मी पृथ्वी

पिछले दिनों ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने पृथ्वी की संरचना को लेकर नया और चौंकाता तथ्य उजागर किया है कि पृ़थ्वी की संरचना सूर्य से बिल्कुल भिन्न है। तथ्य की पुष्टि करता एक अमेरिकी शोध बताता है कि पृथ्वी की उत्पत्ति सौरमंडल से भी करोड़ों वर्ष पुरानी है। तो क्या पृथ्वी सूर्य से नहीं जन्मी, कुलदीप शर्मा की रिपोर्ट

सौरमंडल की उत्पत्ति को लेकर आज तक अनेक आध्यात्मिक और वैज्ञानिक तथ्य सामने आए हैं। ज्ञात हो कि सूर्य और पृथ्वी की उत्पत्ति को लेकर मान्य सभी सिद्धांत गुजरी चार सदियों में खंगाले गए तथ्यों पर आधारित हैं। इनमें सबसे मान्य तथ्य है कि लगभग साढ़े चार अरब वर्ष पूर्व पृथ्वी सूरज से अलग हुई, फिर धीरे-धीरे ठंडी हुई और यहां जीवन पनपा। पृथ्वी धारित्री यानी धरती कहलाई। यहां जीवनदायिनी ऑक्सीजन के अलावा ओजोन का सुरक्षा कवच है तो वहीं नाइट्रोजन, कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन आदि भी हैं। धरती की गहराई खंगालिए तो उसमें सोना, चांदी, लौह जैसी अपार धातुएं भरी पड़ी हैं। इसके केंद्र में भरपूर ऊष्मा है तो उत्तर से दक्षिण तक दंड चुम्बक पसरी हुई है।

सूरज से भिन्न
आस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने नवीनतम सिद्धांत प्रस्तुत किया है, जिसके अनुसार पृथ्वी की रासायनिक संरचना सूर्य की रासायनिक संरचना से सर्वथा भिन्न है। पृथ्वी की वर्तमान संरचना को ‘कोन्ड्राइटिक कम्पोजिशन’ यानी पथरीली संरचना नाम दिया गया है। रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि यह संरचना सूर्य से भिन्न और अधिक प्रभावी है। ज्ञात हो कि पृथ्वी का नब्बे प्रतिशत से भी अधिक भाग क्रिस्टलीय सिलिकेट का है, जो लौह, ऑक्सीजन, सिलिकॉन और मैग्नीशियम संजोए है। रोचक यह है कि पृथ्वी की संरचना ठोस चट्टानों का आधार लिए लगती है, मगर वास्तव में ऐसा है नहीं। यह तो कई पर्तों में लिपटी हुई है और हर परत में कई धातुएं छिपी हैं। आस्ट्रेलियाई शोधकर्ता डॉ़ ह्यू ओनेल के अनुसार चूंकि सूर्य सौरमंडल का 99 प्रतिशत अंश है, अत: यहां की संरचना समानता दिखाती है। अमेरिकी खगोलशास्त्री फॉरेस्टर मोल्टन और पृथ्वी वैज्ञानिक शवरेडर चैम्बरलेन के प्रतिपादित सिद्धांत के अनुसार जब सूर्य से दस गुना बड़ा तारा सूर्य से टकराया तो उससे गाढ़े धुएं सा विशाल द्रव्यमान बाहर आया। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि सौर सतह में खलबली मच गई और वह चटके घड़े सा रिसने लगा। सौर सतह से निकले पदार्थ सूर्य के आसपास चक्कर लगाने लगे, जो बाद में ग्रह बने। पृथ्वी उनमें से एक है। भले ही सूर्य की अतिसक्रियता और धरती की जलवायु के बीच गहरा संबंध है, मगर दोनों की संरचना भिन्न है। तथ्यों के अनुसार पृथ्वी के वायुमंडल में हर वर्ग मीटर में सूरज से प्रति सेकेंड 1324 वॉट ऊर्जा मिलती है। यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग के माइक लॉकबड की रिपोर्ट के अनुसार सूर्य के अंदर खौलते सैलाब का प्रभाव उसके वातावरण को प्रभावित करता है। सूरज का खौलता लावा बड़ी मात्र में पराबैंगनी किरणें पैदा करता है, जिसे वातावरण सोख लेता है। यह स्थिति गैस और धूल के बादलों से सौरमंडल की उत्पत्ति के सिद्धांत से मेल भी खाती है। तथ्य यह भी है कि पृथ्वी का आरंभिक वायुमंडल हाइड्रोजन और हीलियम जैसी हल्की गैसें लिए हुए था, जो गरमाहट के आगे टिक नहीं पाया। इसके अलावा पृथ्वी पर अन्य ग्रहों से चट्टानें भी बरसीं और जाहिर है इनमें कुछ ऐसे पदार्थ समाहित थे, जो मूलत: यहां कभी नहीं थे, मगर बाद में इन्होंने अपना डेरा जमा लिया, जिसने पृथ्वी के निर्माण के अध्ययन को और उलझा दिया।

आस्ट्रेलियाई रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि पृथ्वी पर उपलब्ध कोन्ड्राइटिक यानी चट्टानी भागों का अध्ययन करना अपेक्षाकृत आसान है, मगर वहीं धूमकेतु से प्राप्त विभिन्न पदार्थ इसे बरगलाते भी हैं। यह संरचना पृथ्वी का रासायनिक मेकअप पूर्ण करती है। यूनिवर्सिटी से जारी रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी की ताजा रासायनिक संरचना भिन्न है और स्पष्ट करती है कि वह सूर्य की संरचना से एकदम अलग है। रिपोर्ट में बताया है कि पृथ्वी की संरचना पूरी तरह से ‘कोन्ड्राइटिक कंपोजिशन’ यानी पथरीली है, जो सूर्य की तरह लिजलिजापन नहीं दिखाती। वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार पृथ्वी की संरचना उसके जन्म के बाद से लगातार बदलती रही है। आज की हिमालय पर्वत श्रृंखला लगभग पांच करोड़ वर्ष पूर्व सागर सतह से ऊपर उठी थी। इस तरह से पृथ्वी में कितने ही कायापलट हो चुके हैं, जो समय-समय पर इसकी संरचना में बदलाव लाते रहते हैं। इसकी आंतरिक संरचना में भी चौंकाते परिवर्तन देखे जाते हैं।

इस शोध से जुड़े ऑस्ट्रेलिया की नेशनल यूनिवर्सिटी के रिसर्च स्कूल ऑफ अर्थ साइंसेज के प्रो़ इवान केम्पबेल के अनुसार यह खोज नया अध्याय जोड़ती है। वे मानते हैं कि पृथ्वी के गर्भ में धधकते ज्वालामुखियों में प्राप्त दुर्लभ तत्वों का अनुपात कानडेट्राइट धूमकेतुओं से कहीं अधिक उच्चकोटि का है। जाहिर है कि दूसरे गृह में पृथ्वी तक पहुंचे तत्व भी पृथ्वी में प्राप्त तत्वों के पासंग नहीं हैं। यह पुष्टि करता है कि पृथ्वी का निर्माण बेहतर रासायनिक संरचना लिए हुए है।

कहां टिकी है धरती
पृथ्वी की स्थिति को लेकर कई विचार व धारणाएं भी सामने आई हैं और उन्हीं के आधार पर खगोलशास्त्र का विकास भी हुआ। एक लंबे समय तक लोग इस खोज में रहे कि आखिर धरती टिकी किस पर है? क्या किन्हीं खंभों पर है या देवता इसे संभाले हुए हैं। इसका केंद्र बिंदु क्या है? यह गतिमान है या ठहरी हुई है?

इस जिज्ञासा को शांत करने के लिए दो तर्क सामने आए। एक तो बौद्ध दर्शन का, दूसरा प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट का। दोनों ही अपना अलग महत्व रखते हैं। बौद्ध दर्शन के अनुसार ग्रहों के आधार शून्य भ्रमण देखने से यह अनुमान होता है कि कुछ इसी प्रकार की पृथ्वी भी है। चूंकि पृथ्वी गुरुत्वबल लिए हुए है और यह तय है कि गुरुत्व वाली वस्तु सदैव नीचे गिरती है। अत: यह अनुमान है कि जब से पृथ्वी टूट कर गिरी है, वह गिरती ही चली जा रही है। मगर लोगों ने इसे उचित न मानते हुए काट की और तर्क दिया कि जब धरती गिर रही है तो किसी जगह पर टकराती क्यों नहीं।

दूसरी ओर वैज्ञानिक आर्यभट्ट (476 ई़) का सिद्धांत काफी प्रभावी था। उनकी धारणा थी कि पृथ्वी आकाश में बिना किसी आधार पर टिके हुए अपनी धुरी का चक्कर लगा रही है, इसी तरह रात-दिन चक्र चलता है।

इसी तर्क पर खगोल वैज्ञानिक वराहमिहिर (505 ई़) ने कहा कि जिस तरह से चुम्बक से घिरा हुआ लोहा आकाश में ही टिक जाता है, उसी प्रकार पांच महाभूतों से बनी पृथ्वी आकाश में टिकी हुई है। बाद में और भी तर्क आए कि पृथ्वी बैल, हाथी, कछुआ वगैरह पर टिकी हुई है, मगर वह मान्य नहीं हुए। हां, 1150 ई़ में महान वैज्ञानिक भास्कराचार्य ने बताया कि इस धरती का कोई आधार ही नहीं है। वह तो अपनी शक्ति से स्वभाववश आकाश में सदा ही अवस्थित रहती है।

भारत ही नहीं, विश्व के अन्य देशों में भी धरती के आधार की बात कही गई। पंद्रहवीं सदी में कोपरनिकस की खोजों और सोलहवीं सदी में कोलम्बस की यात्राओं से काफी जानकारियां सामने आईं और उन पर चर्चा भी हुई। इसी श्रृंखला में एडमिरल फेर्नान मेगलॉन द्वारा 1522 में की गई विश्व परिक्रमा महत्वपूर्ण है। उनके प्रस्तुत विवरणों को आधार बनाते हुए गेरेडस मर्केटर (1570) ने विशाल मानचित्र संग्रह प्रकाशित किया था।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:सूर्य से नहीं जन्मी पृथ्वी