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खर्राटे रोकेगा पेसमेकर

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने एक अनोखा पेसमेकर विकसित किया है, जो व्यक्ति विशेष के खर्राटों पर काबू पाएगा। हाइपोग्लोसल नर्व स्टिमुलेशन सिस्टम नामक यह पद्धति अत्यंत संवेदी है, जिसे जीभ के नीचे स्थापित किया जाता है। इस उपकरण का संचालन तंत्रिकाओं को गति देता है, जो जीभ की मांसपेशियों में तनाव पैदा करती है और इससे खर्राटों पर रोक लगती है।

रोचक बात यह है कि यह युक्ति तभी कार्य करती है, जब व्यक्ति गहरी नींद सो रहा होता है। दूसरे, इस पेसमेकर का संचालन रिमोट द्वारा होता है। इसमें लगे सेंसर्स रिमोट दबाते ही सक्रिय हो जाते हैं। इस स्थिति में जीभ की मांसपेशियां हरकत में आ जाती हैं और वह आगे-पीछे होने लगती है। परिणामस्वरूप खर्राटे तुरंत रुक जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार एक सूक्ष्म जेनरेटर वक्ष में उपयुक्त स्थान पर शल्य चिकित्सा द्वारा स्थापित कर दिया जाता है। इसका संबंध जीभ के नीचे लगे इलेक्ट्रॉड से कर दिया जाता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि खर्राटे अपने आप में श्वसन से जुड़ा रोग है और उनकी युक्ति इस रोग पर काबू पाने में सफल है। जल्द ही इस उपकरण का पेटेंट होगा और इसे बड़े स्तर पर प्रयोग में लाया जा सकेगा।
कर्णदीप

चिपकाने वाला नया टेप

एक नए किस्म का टेप ईजाद किया गया है, जो इतना मजबूत है कि आप उसके सहारे अपना टीवी तक आसानी से उठा सकते हैं। मजे की बात यह है कि इसे पुरानी जगह से उखाड़ कर फिर से नई जगह पर इस्तेमाल किया जा सकता है। हथेली भर चौड़ा टेप का टुकड़ा इस काम के लिए काफी है। यही नहीं, यह टेप इतना मजबूत है कि तीन सौ किलोग्राम तक वजन उठा लेता है। बताया गया है कि आविष्कारकों ने छिपकली से प्रेरणा लेकर यह टेप तैयार किया है। हम सब ने देखा है कि छिपकली किस प्रकार उल्टी होकर छत पर मजे से चल लेती है। मजबूती के मामले में इस तकनीक ने छिपकली की प्राकृतिक बनावट को भी मात दे दी है। कार्बन नैनो-टय़ूब आधारित यह चिपकाऊ टेप रोबोटों को दीवार पर चढ़ाने में सहायक हो सकता है। साथ ही, ऑपरेशन के बाद लगाए जाने वाले टांकों का भी यह उपयुक्त विकल्प बन सकेगा।
आर. डी. रेखाड़ी

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