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एक कविता पर बवाल

एक कविता पर दो देशों में बवाल मचा है। जर्मनी और इजरायल, दोनों में एक तरह से ठन गई है। टेलीविजन पर बहसें चल रही हैं और कविता की एक-एक पंक्ति पर आरोप-प्रत्यारोप चल रहे हैं। जर्मनी के नोबेल पुरस्कार प्राप्त कवि गुंटर ग्रास ने कविता लिखी है, ‘ह्वाट मस्ट बी सेड।’ यह कविता इजरायल, उसकी परमाणु शक्ति और ईरान पर हमले की आशंका को लेकर लिखी गई है। लोग आरोप लगा रहे हैं कि गुंटर ग्रास ने इजरायल की अनावश्यक निंदा की है और ईरान के प्रति बेवजह नरमी बरती है। इस बात पर अलग से बहस की जा सकती है कि गुंटर ने क्या लिखा और क्यों लिखा। लेकिन ये बात अपने आप में ईर्ष्या पैदा करने वाली है कि एक कविता ने दो देशों के बुद्धिजीवियों के बीच हलचल पैदा कर दी है। भारत जैसे देश में लोग इस बात को हंसी में उड़ा सकते हैं और कह सकते हैं कि फुरसत में होंगे वे लोग, जो एक कविता पर बहस कर रहे हैं। जिस देश में कबीर से लेकर सुब्रमण्यम भारती, गालिब से लेकर अल्लामा इकबाल, रवींद्रनाथ टैगोर से लेकर फैज अहमज फैज तक कविता की एक गौरवशाली परंपरा रह चुकी है, वहां कितना अजीब है कि कवि होकर कोई व्यक्ति सहज महसूस नहीं कर पाता। अब हमारा समाज न अपने कवियों को पहचानता है और न लेखकों को। ऐसे में गुंटर ग्रास की कविता चाहे जैसी हो, कम से कम कविता पर चर्चा तो हो रही है। एक समाज के जीवंत बचे होने के लिए इतना प्रमाण भी कम नहीं है।
बीबीसी में विनोद वर्मा

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