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मुकदमे वापस लो, फिर होगी करार की बात

किसानों की मांगें
- किसानों को एक बीघे के दिए जाएं सात लाख रुपये।
- सभी किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लिए जाएं।
- ग्रीन बेल्ट की बाध्यता समाप्त कर दी जाए।
- प्रशासन किसानों से कोई बात न करे।
- करार होने के बाद ही प्रशासन अपना रोल निभाए।
- विलयधाम मंदिर को हटाए बगैर बने बड़ा बाईपास।

बड़ा बाईपास के मुद्दे पर किसान प्रशासन की एक सुनने को तैयार नहीं हैं। हालांकि अब किसान संघर्ष समिति मुआवजे से ज्यादा जोर मुकदमे वापस लेने की बात पर जोर दे रही है। रविवार को मुड़िया अहमद नगर में हुई आम सभा में तय किया गया कि अगर मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो किसान 25 अप्रैल से जेल भरो आंदोलन शुरू कर देंगे।


दोपहर 12 बजे शुरू हुई आम सभा में किसान संघर्ष समिति के पदाधिकारियों का साथ देने बरेली कॉलेज के फिजिक्स विभाग के पूर्व हेड प्रो. जावेद अब्दुल वाजिद भी पहुंचे। आम सभा में आए किसानों को परचे बांटे गए जिनमें 15 अप्रैल की शाम तक मुकदमे वापस न होने की स्थिति में 25 अप्रैल से जेल भरने की धमकी दी गई है। किसानों ने कहा कि प्रशासन उन्हें उनकी जमीन की जो कीमत दे रहा है वह नाकाफी है क्योंकि उस रकम से कहीं और जमीन नहीं खरीदी जा सकती। उन्होंने एक बीघा जमीन के कम से कम सात लाख रुपए दिए जाने या बाईपास के टोल टैक्स में आधी हिस्सेदारी दिए जाने की मांग की।
किसान संघर्ष समिति के संरक्षक डॉ. इसरार खां ने कहा कि प्रशासन यह समझने की कोशिश नहीं कर रहा कि किसानों का उनकी जमीन से भावनात्मक जुड़ाव होता है। यही वजह है कि किसानों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन ने अगर अपना रवैया नहीं बदला तो किसान बड़े से बड़ा आंदोलन खड़ा करने में भी नहीं चूकेंगे।

विलयधाम को तोड़े बगैर बने बाईपास
आम सभा में मौजूद कुछ लोगों ने कहा कि बड़ा बाईपास विलयधाम को तोड़े बगैर बनना चाहिए। उनका कहना था कि प्रशासन सड़क के लिए एक धार्मिक स्थल को गिराने पर आमादा है, ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। बता दें कि एडीएम ई राधेश्याम मिश्र करीब तीन महीने पहले विलयधाम को ध्वस्त करने का आदेश दे चुके हैं।

नेताओं के खिलाफ की नारेबाजी
सभा में मौजूद किसानों ने नेताओं के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उन्होंने कहा कि नेता बस वोट लेने उनके पास आते हैं। कोई भी बड़ा बाईपास के मुद्दे पर उनकी पैरवी नहीं कर रहा। किसान नेताओं ने कुछ नेताओं पर तल्ख टिप्पणियां भी कीं। हालांकि, संघर्ष समिति के संरक्षक डॉ. इसरार खां ने कहा कि वह इस मामले को राजनीतिक नहीं बनाना चाहते, इसलिए किसी नेता पर कोई टिप्प्णी नहीं करेंगे।

कमिश्नर के फैसले से बदला रुख
कुछ दिन पहले कमिश्नर के. राममोहन राव ने पांच गांवों के करार की फाइल पर दस्तखत कर दिए थे। मगर, किसान नेताओं से मुलाकात के बाद उन्होंने वह फाइल तहसील से वापस मंगा ली। अगर, करार की फाइल आगे बढ़ जाती तो अब तक प्रशासन पांच गांवों में करार की रकम बांटने की तैयारी कर चुका होता।

नए डीएम-कमिश्नर के सामने होगी चुनौती
बड़ा बाईपास नए डीएम-कमिश्नर के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। सुलझते-सुलझते उलझा यह मामला अब किस दिशा में जाएगा, इस बारे में कुछ भी कह पाना मुश्किल है। एनएचएआई के अफसर किसानों को 2010 का रेट लेने के लिए राजी करने में जुटे हैं, दूसरी ओर किसान संघर्ष समिति एक हेक्टेटर के एक करोड़ से कम लेने को राजी नहीं हैं।

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