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कांग्रेस नेता वाणी संयम पर ध्यान दें

पंजाब कांग्रेस ने अंतर्कलह और मतभेदों और आरोप-प्रत्यारोप के दौर से गुजर रही कांग्रेस की छवि को धूमिल होने से बचाने के लिए सभी नेताओं से अनुशासन में रहने और वाणी संयम बरतने की अपील की है।

इन सभी विधायकों ने शनिवार को यहां एक संयुक्त बयान में कहा कि जहां तक पार्टी की हार का मामला है उसके लिए कौन जिम्मेदार है इस बारे में हाईकमान विचार कर रहा है। ऐसे में हाईकमान के फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। यह समय अकाली सरकार की बदले की भावना से की जा रही कार्रवाई का शिकार हो रहे अपने कार्यकर्ताओं
 को बचाने का है न कि आपस में लड़ मरने का।

इन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे समय में लोगों में जाकर एक दूसरे के विरूद्ध बयानबाजी करना पार्टी के हितों के विरूद्ध है। पार्टी के कार्यकर्ताओं तथा पदाधिकारियों का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। प्रदेश अध्यक्ष को बदलने के बारे में कोई फैसला हाईकमान को लेना है और वह सभी को मंजूर होगा।

उन्होंने खुलासा किया कि अकाली- भाजपा गठबंधन सरकार अपनी दुश्मनी की सियासत पर भी लौट आई है और उन्होंने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाते हुए उन पर अत्याचार करना शुरू कर दिया है। यह समय पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ खडे़ होने का है। पार्टी मामले संबंधी फैसला हाईकमान पर छोड़ देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेताओं को एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए आगामी नगर निगम तथा 2014 में होने वाले लोकसभा चुनावों पर भी ध्यान देने की जरूरत है ऐसे में पार्टी केअंदरूनी मामलों को लेकर लोगों में जाना कार्यकर्ताओं का मनोबल गिराने के अलावा भ्रम और गलतफहमी पैदा करता है इस सबसे किसी भी कीमत पर बचने की आवश्यकता है।

इस बयान को समर्थन देने वाले विधायकों में सर्वश्री लाल सिंह, अश्विनी सेखडी, राजिन्दर बाजवा, अरुणा चौधरी, सुख सरकारिया, ओ.पी.सोनी, रमनजीत सिक्की, राणा इकबाल सगंत सिंह गिल्जियां, सुंदर शाम अरोडा, बलबीर सिद्धू, जगमोहन सिंह कंग, गुरकीरत कोटली शामिल हैं।

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