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आरटीई एक्ट में हो सकता है संशोधन

6 से 18 साल के बच्चों को अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा कानून (आरटीई) में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद संशोधन की संभावना है। केन्द्र सरकार का यह कानून देशभर में लागू है। अब जबकि सुप्रीम कोर्ट ने नई व्यवस्था दी है तो उसे लागू करने के लिए केन्द्र सरकार को आरटीई में संशोधन करना होगा।

प्राथमिक शिक्षा निदेशक सह शिक्षा विभाग के प्रवक्ता आर एस सिंह ने बताया कि यदि केन्द्र सरकार माननीय न्यायालय के फैसले के आलोक में कोई बदलाव करती है, और अगर यह बदलाव हमारी नियमावली प्रावधान से अलग होगा तो बिहार में भी कुछ संशोधन किया जा सकता है। यह निर्भर इस पर करेगा कि केन्द्र सरकार अपने एक्ट में क्या संशोधन करके उसे लागू करती है।

विदित हो कि सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार कानून को संवैधानिक ठहराते हुए कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए नामांकन में 25 प्रतिशत आरक्षण को हर स्कूल में लागू कर दिया है। यह आरक्षण सभी सरकारी, वित्तीय सहायता प्राप्त और सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक तथा बोर्डिग स्कूलों में लागू होगा।

इस कानून से वैसे अल्पसंख्यक स्कूल बाहर रहेंगे जो किसी तरह की सहायता सरकार से नहीं पाते हैं। यह व्यवस्था तुरंत लागू होगी। जहां दाखिला हो चुका है वहां अगले साल से इसका पालन होगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद केन्द्रीय मानव संसाधन विकास विभाग के मंत्री कपिल सिब्बल ने भी कहा था कि अनिवार्य एवन निशुल्क शिक्षा कानून के दायरे से मदरसों और वैदिक पाठशालाओं को अलग रखा जाएगा।

अब ऐसे में गैर सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक स्कूल, मदरसों और वैदिक पाठशालाओं को आरटीई के दायरे से बाहर रखने के लिए पूर्व के कानून में अलग से प्रावधान करने होंगे। इसको लेकर मौजूदा एक्ट में संशोधन एक जरूरी बात हो गई है।

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