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मिलिए 12 साल के बाबा ‘रामदेव’ से

चेहरे पर तेज। आंखों में चमक। पहली बार में ही चेहरा आपको ऐसी याद दिलाए कि आप किसी पूर्व जन्म के योगी से मुलाकात कर रहे हैं। मात्र 12 साल की उम्र में ऐसे हुनर, जिनके बारे में सोचकर इस उम्र के बच्चे दांतों तले अंगुली दबा लें। हम बात कर रहे हैं आगरा के 12 साल के बाबा ‘रामदेव’ रामदास ब्रrाचारी की। मुकेश शर्मा की पांचवी संतान रामदास ब्रrाचारी इस उम्र में 300 से अधिक योग मुद्राओं में पारंगत हैं। ऐसा कोई योगासन नहीं, जिसे ब्रrाचारी न कर सकें। आध्यात्म और योग का चमत्कारी मेल है रामदास ब्रrाचारी।

पूत के पांव पालने में आए थे नजर
12 अक्टूबर 1999 को स्वास्थ्य विभाग में चालक मुकेश शर्मा के यहां जन्मे रामदास ब्रrाचारी जन्म के तीसरे माह से ही ऐसी हरकतें करते थे, जिस वजह से उनके पिता को लग गया था कि उनके यहां किसी विलक्षण प्रतिभा ने जन्म लिया है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती गई, रामदास ब्रrाचारी के शरीर के लोच को देखकर परिजन और आसपास के लोग कहने लगे कि बड़ा होकर यह बालक कुछ ऐसा करेगा, जो औरों से अलग होगा। रामदास ब्रrाचारी ने छह साल की उम्र से योग करने का जो सिलसिला शुरू किया वह आज 12 साल की उम्र में प्रवेश करते-करते 300 से अधिक योग मुद्राएं कर लेने के अभ्यास में तब्दील हो गया है। कितना भी कठिन योगासन हो, ब्रrाचारी के लिए मामूली बात होती है। आज स्थिति यह है कि 12 साल का बालक रोजाना 5 घंटे पद्मासन की स्थिति में निरंतर बैठ सकता है और घर में बने ध्यान कक्ष में तीन घंटे ध्यान भी लगाता है।

दो दिन के बाद आज तक नहीं गया स्कूल
आम बच्चों की तरह रामदास ब्रहम्‍चारी को परिजनों ने स्कूल भेजा तो दूसरे दिन ही उन्होंने घर आकर कह दिया कि मास्टर तंबाकू खाकर पढ़ाते हैं, मैं किसी ऐसे व्यक्ति से नहीं पढ़ूंगा जो झूठे मुंह से मुङो पढ़ाएगा। इसके बाद घर पर अपनी बहन से पढ़ना शुरू किया और आज गीता, रामचरित मानस, रामायण, शिवपुराण, दुर्गा शप्तशती, देवी भागवत रामदास ब्रहम्‍चारी को कंठस्थ हैं। घर में बने मंदिर के वह मुख्य पुजारी हैं। परिजनों का कहना है कि आज तक ब्रrाचारी ने कभी मुंह से गाली नहीं निकाली। उनका पूरा दिन योगाभ्यास, मंदिर में हनुमान जी की पूजा और ध्यान में बीतता है।

डॉ. आयंगर हैं ब्रहम्‍चारी के प्रेरणास्त्रोत
विश्व में भारतीय योग का डंका बजा चुके पद्मश्री डॉ. आयंगर से ब्रहम्‍चारी योग की प्रेरणा लेते हैं। पिछले वर्ष ब्रrाचारी ने अयोध्या के सरयूदास महाराज से दीक्षा ली है। ब्रहम्‍चारी की बड़ी बहन आराधाना भी साध्वी बनने की राह पर हैं। वह रामदास ब्रrाचारी को घर पर पढ़ाती हैं और अब उन्हें अंग्रेजी का ज्ञान करा रही हैं।

पिता भी साधुओं के साथ रहे हैं 12 साल
रामदास ब्रहम्‍चारी के पिता मुकेश शर्मा ताइक्वांडो के ब्लैक बेल्टधारी हैं। कुछ साल पहले मुकेश शर्मा अपने बच्चाों व परिवार को छोड़कर साधुओं की सेवा के लिए चले गए थे। साधुओं के साथ रहकर मिली प्रेरणा से ही मुकेश शर्मा को अपने सबसे छोटे बेटे को ब्रrाचारी रखते हुए देश और समाजसेवा के लिए समर्पित करने का निर्णय लिया।

पूरे भारत में करना है योग का प्रचार
रामदास ब्रहम्‍चारी ने ‘हिन्दुस्तान’ को बताया कि वह योग के माध्यम से स्कूली बच्चाों को अपने शरीर को स्वस्थ्य रखने के प्रति सचेत करना चाहते हैं। अगले कुछ दिनों में वह प्राणायम का अभ्यास शुरू करने वाले हैं। वह कहते हैं कि कभी भारत विश्व का योग गुरु था, मुङो अपने देश का वही युग वापस लाना है। उन्होंने प्रण लिया है कि वह भविष्य में किसी विदेशी को योग नहीं सिखाएंगे।

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