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ईमानदारी महंगा शौक, ट्राई करें

कमल हासन भारतीय सिनेमा जगत में एक ऐसे शख्स का नाम है, जिन्हें न सिर्फ उनकी बहुमुखी प्रतिभा के लिए पहचाना जाता है, बल्कि अपने सामाजिक सरोकार के लिए वह देश भर में सम्मान की निगाहों से देखे जाते हैं। अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन, पार्श्व गायन और न जाने कई विधाओं में माहिर कमल हासन दक्षिण के शायद ऐसे अकेले बड़े पुरुष कलाकार हैं, जो बॉलीवुड में भी समान रूप से सफल रहे। साल 1991 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कमल हासन ने आईआईटी मुंबई में एक प्रेरक भाषण दिया। पेश हैं उसके अंश:
 
व्यावहारिक ज्ञान जरूरी
मुझे नहीं पता कि अच्छा लेक्चर क्या होता है और खराब लेक्चर किसे कहते हैं। मैं तो बस लोगों से बात करना जानता हूं। आज मैं आपसे बात करने ही आया हूं। मैंने इस लेक्चर के लिए किसी तरह की तैयारी नहीं की है। मैं बिना तैयारी के आया हूं, बिल्कुल उसी तरह, जैसे मैं आठवीं कक्षा की परीक्षा देने गया था। मैं पढ़ाई में अच्छा नहीं था। मैं हाई स्कूल ड्रॉप आउट हूं। मैंने जो कुछ सीखा है, वह अनुभव से सीखा। डिग्री हासिल करने के बाद लोग समझने लगते हैं कि उन्होंने अब सब कुछ हासिल कर लिया है। लेकिन ऐसा है नहीं। सच तो यह है कि कॉलेज के बाद ही आपके जीवन की असली शुरुआत होती है। तब आप हकीकत से रूबरू होते हैं। इसलिए जब आप कॉलेज से डिग्री लेकर बाहर निकलें, तो ध्यान रखें कि अब आप शुरुआत करने जा रहे हैं। आपके सीखने की असली शुरुआत कॉलेज से बाहर आने के बाद होती है।
 
ईमानदारी कठिन रास्ता
मैं यह अच्छी तरह से जानता हूं कि ईमानदार बनने की सलाह देना आसान है, लेकिन ईमानदारी की राह पर चलना कठिन है। दरअसल, ईमानदारी एक महंगा शौक है, जो सबके बस की बात नहीं है। इस शौक को पालने से कई दिक्कतें पैदा हो सकती हैं। लेकिन यह मानव जीवन का श्रेष्ठ मूल्य भी है। आपको इस शौक को पालने की कोशिश जरूर करनी चाहिए। ट्राई कीजिए। मैंने यह कोशिश की है। इसका खामियाजा भी उठाया है, आपको भी उठाना होगा। जब आप कॉलेज से बाहर निकलेंगे, तो आपका इन सबसे से सामना होगा। फिर भी, ईमानदार बनने की कोशिश जारी रहनी चाहिए।

विरोध जताना सीखें
जिस काम को आप पसंद नहीं करते, उसे स्वीकार मत कीजिए, उसके संदर्भ में अपना विरोध दर्ज कराएं। आप कहेंगे कि आजकल खराब फिल्में आ रही हैं। हमारे नेता खराब हैं, हमारी स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। अगर सब कुछ खराब है और इसे आप समझते भी हैं, तो आप इसे स्वीकार क्यों कर रहे हैं? खराब फिल्में आ रही हैं, तो इन्हें मत देखिए। लोग खराब फिल्में देखना बंद करेंगे, तो फिल्म निर्माता अच्छी फिल्में बनाने को बाध्य होंगे। नेता खराब हैं, तो उनका विरोध करें। चुप मत रहिए। चुप रहने का मतलब है स्वीकार करना। इसलिए विरोध करना सीखें। जो आपका हक है, उसकी मांग कीजिए।

आत्मसम्मान से समझौता नहीं
लोग अक्सर कहते हैं कि पैसा कमाने के लिए समझौता करना पड़ता है। नहीं,  यह सही नहीं है। मैं इस बात का उदाहरण हूं। मैंने अपनी शर्तो पर अपना रास्ता तय किया है। हम अपने आत्मसम्मान और मूल्यों से समझौता किए बिना भी पैसा कमा सकते हैं। मैंने ऐसी किसी फिल्म में काम नहीं किया, जिसकी स्क्रिप्ट मुङो पसंद न हो। मुझे जो ठीक लगा, वही मैंने किया। जो मन को अच्छा नहीं लगा, उसे अस्वीकार कर दिया। दरअसल, समझौता और सहनशीलता दो अलग चीजें हैं। कई जगह हमें सहनशीलता दिखानी चाहिए। अगर हमारी सहनशीलता से बात बनती है, तो ठीक है। निस्संदेह, कई जगह हमें व्यावहारिक कदम उठाने पड़ते हैं। लेकिन ऐसी बात स्वीकार मत करो, जिसके करने से आपके आत्मसम्मान को ठेस लगे।
 
परिवर्तन शाश्वत सच
हम सभी वर्तमान हालात से खुश नहीं हैं। हम बदलाव चाहते हैं। लेकिन बदलाव की मांग करने से ही काम नहीं बनेगा। खुद बदलाव का हिस्सा बनें। हमेशा यह सोचना कि दूसरा व्यक्ति बदलाव की पहल करे, यह ठीक नहीं है। आप खुद भी बदलाव की कोशिश करें। मैं महात्मा गांधी का बहुत बड़ा फैन हूं। उन्होंने कहा था कि बदलाव की मांग करने की बजाय खुद परिवर्तन करना होगा। और गांधीजी ने यह करके दिखाया। उनके अंदर बेहतरीन प्रबंधन कला थी। उन्होंने बड़ी खूबसूरती से देश को एक धागे में पिरोया। इसलिए मैं उनका फैन हूं। हमें उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। कुछ लोग कहेंगे कि भला आप गांधीजी से अपनी तुलना कैसे कर सकते हैं। मैं कहता हूं कि क्यों नहीं कर सकते। हम भी गांधीजी की तरह परिवर्तन की पहल कर सकते हैं। इस दुनिया में परिवर्तन जैसा शाश्वत सच कुछ भी नहीं है। परिवर्तन तो होना ही है। हमें पहल करनी होगी। हर बात के लिए दिल्ली की तरफ क्यों देखना? हमें यह सोचना चाहिए कि हम अपनी जगह रहकर क्या कुछ कर सकते हैं।
 
जिम्मेदारी का अहसास
हम चाहे जिस भी पेशे में हों, हमें अपनी जिम्मेदारी का अहसास होना चाहिए। फिल्ममेकर को भी यह पता होना चाहिए कि वह जो फिल्में बना रहा है, उसका समाज पर क्या असर होगा। हालांकि मुङो नहीं लगता कि हम फिल्म इंडस्ट्री वाले वाकई जिम्मेदार हैं। आप कॉलेज से निकलकर किसी अन्य इंडस्ट्री में काम करेंगे। ज्यादा से ज्यादा लाभ कमाने का मसला आपके सामने भी आएगा। जब आप पैसे की तरफ देखेंगे, तो जिम्मेदारी से समझौते करने पड़ेंगे। लेकिन मैं आपसे यही कहूंगा कि हर हाल में आपको जिम्मेदारी निभानी चाहिए। धन कमाने की अंधी दौड़ में आप मानवता व देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से दूर नहीं भाग सकते।
प्रस्तुति: मीना त्रिवेदी

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