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सजा सरीखी हैं परंपराएं वरुण

वरुण बडोला टेलीविजन जगत के एक ऐसे सितारे हैं, जो हमेशा कुछ नया कुछ अलग करते हैं। जीटीवी के नए सीरियल ‘फिर सुबह होगी’ में वह एक चुनौतीपूर्ण किरदार निभा रहे हैं। एक खास बातचीत में वरुण ने शुभा दुबे के समक्ष अपने नए किरदार और अपनी जिंदगी से जुड़े कुछ राज खोले।

आपके करियर को एक बड़ी शुरुआत जीटीवी के सीरियल कोशिश से मिली थी। अब इतने सालों बाद आप फिर जीटीवी के ही नए सीरियल ‘फिर सुबह होगी’ में नेगेटिव रोल कर रहे हैं। अपने किरदार के बारे में कुछ बताएं?

मेरे किरदार का नाम ठाकुर विक्रम सिंह है। विक्रम सिंह एक ऐसा आदमी है, जिसे ना सुनने की आदत नहीं। वह जो चाहता है उसे पा लेता है। उसके घमंड की वजह उसकी दौलत और ताकत है। ठाकुर के मन की बात जानना बेहद मुश्किल है। कह सकते हैं कि यह किरदार बेहद जटिल है और इससे समझ पाना बेहद कठिन।

फिर सुबह होगी’ मध्य प्रदेश के बुन्देलखंड के बेड़िया समुदाय की सर ढकाई परंपरा पर आधारित है। इस परंपरा के बारे में जब आपको पता चला तो आपकी क्या प्रतिक्रिया थी? क्या मन में शो को न करने का विचार भी आया था?

हमारे देश में ऐसी कई परंपराएं हैं, जो महिलाओं और लड़कियों के लिए किसी सजा से कम नहीं। जब सर ढकाई के बारे में पता चला तो मुझे बुरा तो लगा, पर इतना नहीं कि मैं अंदर तक कांप जाऊं, क्योंकि इससे कई ज्यादा बुरे और दिल दहला देने वाले किस्से और परंपराओं के बारे में मैं जानता हूं। हालांकि बेड़िया समुदाय की इस परंपरा के इतिहास और उससे जुड़ी हुई बातों को जानने की जिज्ञासा जरूर हुई। जिज्ञास थी अपनी जड़ों को जानने की और यह समझने की कि हम किस ओर बढ़ रहे हैं।

अपने करियर में आपने हमेशा लीक से हटकर भूमिकाएं निभाई हैं। लेकिन इन सब में आप खुद को किस किरदार के सबसे करीब पाते हैं?
मैंने कई अलग-अलग तरह के रोल किए और इन सबको करने में मुझे मजा आया। मैं किसी एक किरदार का नाम नहीं ले सकता, क्योंकि मैंने सभी में एक जैसी मेहनत की और सब मेरे दिल के बेहद करीब हैं।

आप ‘हासिल’ जैसी बेहतरीन फिल्म का हिस्सा रहे हैं, क्या आपने कभी पूरी तरह से फिल्मों से जुड़ने की नहीं सोची?
हां, मैं हासिल, चरस और मैं मेरी पत्नी और वो का हिस्सा रहा हूं, लेकिन मैं पूरी तरह से फिल्मों का हिस्सा क्यों नहीं बन पाया, इसका जवाब फिल्म इंडस्ट्री के डायरेक्टर ज्यादा अच्छे से दे सकते हैं। हालांकि फिल्मों में काम करना मुझे बेहद पसंद है। केवल एक्टिंग ही नहीं, डायलॉग लिखना और डायरेक्शन भी मुझे बेहद पसंद हैं। डायलॉग राइटिंग ने मेरी जिंदगी में अचानक दस्तक दी थी, लेकिन डायरेक्शन मुझे हमेशा से ही पसंद है और शायद एक्टिंग से भी ज्यादा। मैंने तिशु भाई (तिग्मांशु धूलिया) के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया और मैं यह यकीन से कह सकता हूं कि मैं एक बेहद अच्छा असिस्टेंट डायरेक्टर था।

फिल्म निर्देशक तिग्मांशु धूलिया के साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा?
तिग्मांशु भाई के साथ काम करने का अनुभव और उनके साथ को बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है और आज मैं जो भी हूं और जहां भी हूं, वह सब उनकी वजह से ही हूं। वो मेरे लिए हमेशा सबसे खास रहे हैं और रहेंगे।

आपका पसंदीदा हॉलीडे डेस्टिनेशन कौन  सा है और वहां की कौन सी बात आपको सबसे अच्छी लगती है?

साल का कोई भी वक्त हो और कोई भी मौसम या कोई भी मौका हो, हवाई मेरा फेवरेट डेस्टिनेशन है। वहां की जिंदा दिली और खुशनुमा माहौल मेरे अंदर नई ताकत और पॉजिटिविटी भर देते हैं।

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