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2010 से बढ़ी फीस नहीं वसूल सकते आईपीयू के कॉलेज

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में की गई फीस बढ़ोत्तरी अब सिर्फ 2011-12 से ही ली जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2010 से नहीं ली जाएगी। ऐसा करने वाले संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

आईपीयू के संयुक्त रजिस्ट्रार कर्नल प्रदीप उपमन्यु की ओर से जारी एक आदेश में कहा गया है कि स्टेट फीस रेगुलेटरी कमेटी की बैठक में यह तय हुआ है कि बढ़ी हुई फीस सिर्फ शैक्षणिक सत्र 2011-12 में लिए जाएगी। यह 2010-11 में लागू नहीं होगी।

क्या है पेच: आईपीयू से मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों में फीस बढ़ोतरी की गई है। फीस बढ़ोत्तरी सिर्फ 2011-12 में लागू होगी। लेकिन, इन संस्थानों में इस बढ़ोत्तरी के नाम पर 2010-11 से पैसे की वसूल किए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य फंड के नाम पर भी मनमाने ढंग से पैसा वसूलने की शिकायत सामने आ रही है। पिछले दिन सीपीजे इंस्टीट्यूट, नरेला में छात्रों ने इसको लेकर कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ जमकर हंगामा किया था।
पांच श्रेणी में हुई है

फीस वृद्धि: आईपीयू से मान्यता प्राप्त निजी संस्थानों को ए प्लस, ए, बी, सी और डी पांच श्रेणी में बाटा गया है। श्रेणी ए प्लस में चार इंस्टीट्यूट हैं जिसमें 20 फीसदी, ए में 47 संस्थान हैं जिसमें 15 फीसदी, बी में 16 संस्थान हैं जिसमें 10 फीसदी, सी में 7 इंस्टीट्यूट आते हैं जिसमें 5 फीसदी और श्रेणी डी में तीन फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई है।

कोर्ट जाएंगे संस्थान
बढ़ी हुई फीस को शैक्षणिक सत्र 2010-11 से लागू नही करने से आईपीयू से मान्यता प्राप्त संस्थानों में नाराजगी है। एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंशियल इंस्टीट्यूट के महासचिव आर.के. टंडन का कहना है कि नियम और कानून को ताक पर रखकर फीस बढ़ोत्तरी में बदलाव किया गया है। अगर कोई बदलाव करना है तो उसके लिए गजट में नोटिफिकेशन कराना चाहिए। स्टेट फीस रेगुलेटरी कमेटी सिर्फ सिफारिश कर सकती है। उन्होंने कहा कि एसोसिएशन इसके खिलाफ कोर्ट जाने की तैयारी में है।

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  • Web Title:2010 से बढ़ी फीस नहीं वसूल सकते आईपीयू के कॉलेज