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साहब बैठ बोलेरो में, मैं तेरे लिए ही लाया..

बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा शिक्षामित्र पर मेहरबानी के बाद अब चर्चित लिपिक पर मेहरबानी की गई है। साहब के वास्ते किराए पर गाड़ी का टेंडर चर्चित लिपिक के नाम ही निकला है। मात्र एक रुपये के अंतर से उसे टेंडर मिला है। सनद रहे कि विभाग द्वारा पूर्व में लिपिक की गाड़ी का प्रस्ताव भेजे जाने पर सीडीओ ने प्रस्ताव रद करते हुए गाड़ी के लिए टेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे।

बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा हाल ही में बीएसए के लिए किराए पर गाड़ी को टेंडर निकाला गया था। टेंडर भी विभाग को मजबूरी में निकालना पड़ा था। दरअसल, कुछ माह से बीएसए नरेश कुमार वर्मा जिस गाड़ी में सफर कर रहे थे, वह विभाग के ही एक कर्मचारी के परिचित की थी। उसे 17 हजार रुपये प्रतिमाह का भुगतान किया जा रहा था।

चर्चित लिपिक को जब इसकी जानकारी हुई तो वह बोलेरो ले आया। एक दिन साहब ने गाड़ी की सैर भी कर ली। बाद में लिपिक की गाड़ी को विभाग से किराए पर संबद्ध करने के लिए सीडीओ को प्रस्ताव भेजा गया। सीडीओ ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए तत्काल टेंडर जारी करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद टेंडर जारी किया गया। विभाग को चार टेंडर प्राप्त हुए। इनमें चर्चित लिपिक और पहले से विभाग में लगी शिकोहाबाद की गाड़ी का भी टेंडर था।

टेंडर समिति सदस्यों के सामने खुले तो उनमें बाजी चर्चित लिपिक के नाम ही लगी। 15,999 रुपये मासिक में मय ड्राइवर के उसकी गाड़ी विभाग से अटैच कर दी गई। हालांकि देखने वाली बात यह रही कि उसे मात्र एक रुपये के अंतर से टेंडर मिल गया। एक अन्य व्यक्ति ने 16,000 रुपये का टेंडर भरा था। सूत्रों की मानें तो टेंडर में खेल भी हुआ। वहीं टेंडर डालने वाला मैनपुरी का व्यक्ति पहुंचा ही नहीं। एक टेंडर के फर्जी होने की भी चर्चा रही।

टेंडर के समय समिति सदस्यों में डिप्टी बीएसए फस्र्ट हरीशचंद्र चक और डिप्टी बीएसए सेकेंड बीएन कुशवाह और डबल एओ मौजूद थे। बीएसए समिति में होने के बावजूद टेंडर में नहीं पहुंचे। घर पर फाइल पहुंचाई गई और उस पर दस्तखत हुए। बाद में टेंडर मिलने पर चर्चित लिपिक ने कार्यालय में मिठाई भी बांटी।

चल रहा था कमीशनखोरी का खेल
फिरोजाबाद। कमीशनखोरी के खेल में विभाग को चूना भी लग गया। दरअसल, बीएसए के लिए पूर्व में जो गाड़ी कार्यालय से अटैच थी, वह विभागीय कर्मचारी द्वारा ही शिकोहाबाद के परिचित की लगवाई गई थी। इसके लिए उसे प्रतिमाह 17 हजार रुपये का भुगतान किया जा रहा था, जबकि अब टेंडर 15,999 रुपये का जारी हुआ है। विभाग को अब तक प्रतिमाह एक हजार रुपये का अधिक भुगतान करना पड़ा।

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