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सेना भर्ती में अफसरों ने चहेतों को बांटी नौकरियां

सेना की यूनिट जूनियर लीडर्स अकादमी (जेएलए) में पिछले दिनों हुई भर्तियों में जमकर फर्जीवाड़ा हुआ। सैन्य अफसरों ने फर्जी मार्कशीट और आयु प्रमाण पत्र लगाने वाले अभ्यर्थियों को सेना की नौकरी बांट दी। एक अभ्यर्थी को दो अलग-अलग जन्मतिथि के साथ नियुक्ति पत्र जारी कर दिया तो कुछ ने फर्जी यूनिवर्सिटी से हाईस्कूल की मार्कशीट बनवाकर नौकरी पा ली। चतुर्थ और तृतीय श्रेणी में हुई चार दजर्न से अधिक भर्तियां इसी तरह की गईं हैं।

‘हिन्दुस्तान’ द्वारा की गई पड़ताल में अब तक 13 पदों पर भर्तियों में गड़बड़ी का मामला सामने आया है। कुछ अभ्यर्थियों ने इन भर्तियों में हुई गड़बड़ियों के मामले में रक्षा मंत्रलय के अलावा सैन्य मुख्यालय, सेंट्रल कमांड और यूबी एरिया जीओसी को भी शिकायती पत्र भेजा है। हालांकि जेएलए के अफसर इस मामले में कुछ बोलने से बच रहे हैं।

भर्तियां
भारत सरकार की ओर से जेएलए में भर्तियों के लिए 29 दिसम्बर 2011 को आवेदन मांगे गए थे। इसमें 48 पदों पर भर्तियां होनी थी। इसके कुछ माह पूर्व 17 कर्मचारियों की भर्तियां की जा चुकीं थीं।

कुछ ऐसे भी फर्जीवाड़े
- गेस्टोनेटर आपरेटर(जी आपरेटर) का पद खाली न होने के बाद भी स्टाफ के एक कर्मचारी के बेटे को इस पर नियुक्ति दे दी गई।
- जेएलए में कार्यरत एक कर्मचारी की श्री राममूर्ति इंजीनियरिंग कॉलेज से बीटेक कर रही बेटी को लिपिकीय संवर्ग में नियुक्त कर लिया जो अभी अपनी पढ़ाई पूरी कर रही है।
-बार्बर के पद पर एक महिला कर्मचारी के रिश्तेदार को रखा गया जो भर्ती बोर्ड में नियुक्त की गई थी।
- भर्ती बोर्ड में नियुक्त एक अन्य जेएलए स्टाफ ने अपने रिश्तेदार को सिनेमा आपरेटर के पद पर नियुक्त करा दिया।
- अभ्यर्थियों की मेरिट लिस्ट या परीक्षा परिणाम सार्वजनिक नहीं किए गए।

केस-एक
लाला राम नाम के अभ्यर्थी ने गुरुकुल विश्वविद्यालय वृंदावन मथुरा से हाईस्कूल पास की मार्कशीट लगाई है। उसने यह परीक्षा बरेली के राजकुमारी इंटर कॉलेज अशोक नगर सेंटर से दी है। जबकि इस विवि को यूजीसी ने फर्जी करार देते हुए इसकी सभी प्रकार की डिग्रियां अमान्य कर दी थीं। वहीं दूसरी ओर कोई भी विवि इंटर कॉलेज या हाईस्कूल के लिए मान्यता नहीं देता है। इस मार्कशीट के अनुसार उसने 2008 में हाईस्कूल पास किया है। लाला राम की भर्ती माली के पद पर की गई है।

‘‘ 2006 में यूजीसी ने इसे विश्वविद्यालय मानने से इनकार कर दिया था। हम किसी भी  बाहरी हाईस्कूल, इंटरमीडिएट या किसी अन्य कॉलेज-विद्यालय को मान्यता नहीं देते हैं। यहां से पढ़ाई करने वाले छात्रों की डिग्री की मान्यता यूजीसी ने रद्द कर दी है। ’’
आचार्य सुदेश, कुलपति/प्रभारी, गुरुकुल विश्वविद्यालय, वृंदावन

केस-दो
इमरान खां नाम के अभ्यर्थी की भर्ती ड्राइवर के लिए की गई है। इमरान खां पुत्र इसरार खां निवासी नगर पंचायत ठिरिया के नाम से दो नियुक्ति पत्र जारी हुए हैं।
- पहला 13 मार्च 2012 को जारी किया गया है। इसमें अभ्यर्थी की जन्मतिथि 6 दिसम्बर 1992 दर्ज है।
- दूसरा नियुक्ति पत्र 26 मार्च 2012 को जारी किया गया है। इसमें अभ्यर्थी की जन्मतिथि बदलकर 6 जनवरी 1990 कर दी गई।
- दोनों नियुक्ति पत्र में जेएलए के कमांडेंट बिग्रेडियर डीएस ग्रेवाल के हस्ताक्षर और मोहर लगी हुई है।

भर्ती बोर्ड पर सवालिया निशान
सेना में भर्ती के लिए एक बोर्ड बनाया जाता है। इसमें यूनिट के अफसरों के अलावा कुछ बाहरी अफसरों को भी रखा जाता है। यह भर्ती बोर्ड अभ्यर्थियों के आवेदन स्क्रीनिंग से लेकर डाक्यूमेंट की जांच, वेरिफिकेशन आदि करता है। सभी जांच के बाद अभ्यर्थियों के टेस्ट और आवश्यक शारीरिक, तकनीकी परीक्षा भी इसी बोर्ड के माध्यम से कराई जाती है। भर्ती के लिए पूरी तरह बोर्ड जिम्मेदार होता है। जेएलए में हुई भर्तियों में भी पांच सैन्य अफसरों का एक बोर्ड बनाया गया था। इसमें ये शामिल थे।
- ले. कर्नल सतीश चंद्र, चेयरपर्सन
- मेजर पी आचार्य
- मेजर पीएस जोशी
- मेजर विनीत चौधरी
- मेजर जेएन शर्मा

‘ इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते हैं।’
मेजर जितिन शर्मा, एडजुटेंट, जेएलए

‘मैं इस मामले में डील नहीं करता, इसलिए कुछ नहीं कह सकता हूं।’
मेजर विक्रम सिंह, एक्यू, जेएलए

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