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अब दस किलोमीटर की दौड़ बगैर हो सकेंगे प्रोन्नत

प्रदेश सरकार जल्द ही पुलिस महकमे को बड़ी राहत देने जा रही है। बसपा सरकार द्वारा हेड कांस्टेबिल और सब-इंस्पेक्टर को प्रोन्नत कर सब-इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर बनाने की नियमावली में बदलाव करने की कवायद जारी है। लिखित परीक्षा के साथ ही दौड़ की दूरी कम करने पर विचार हो रहा है।

सब-इंस्पेक्टरों के प्रमोशन के लिए नवनीत सिकेरा कमेटी की रिपोर्ट पर अमल की तैयारी है। डीजीपी की उपस्थिति में गृह विभाग में हुई उच्चस्तरीय बैठक में बसपा सरकार में बनी नियमावली को अव्यवहारिक पाया गया और इसमें बदलाव पर सहमति बनी है।

पुलिस के हेड-कांस्टेबिलों को सब-इंस्पेक्टर और सब-इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर बनाने के लिए बसपा सरकार ने वर्ष 2008 में नई नियमावली बनाई थी। इसके तहत सिपाही और हेड कांस्टेबिल को प्रमोशन के लिए दस किलोमीटर दौड़ का प्रावधान था। दस किलोमीटर की दौड़ की शतई के कारण दौड़ते वक्त कई सिपाहियों की मौत हुई।

जिसपर खासा हो-हल्ला भी मचा था। लिखित परीक्षा के लिए तमाम ऐसे विषयों के प्रश्नपत्र शामिल किए गए, जो कि पुलिसिंग के लिए जरूरी नहीं थे। मसलन, सब-इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति के लिए गणित का प्रश्नपत्र रखा गया।

एसआई रैंकर की परीक्षा में सिर्फ 3200 सिपाही ही पास हुए, जबकि लिखित परीक्षा में उन्हें ही सफलता मिली जो फील्ड में तैनात नहीं रहे यानी पुलिस यूनिटों में तैनात रहे सिपाही ही पढ़ाई कर पास हुए। जिले की आम पुलिसिंग करने वालों को मौका नहीं मिला। इसी तरह एसआई से इंस्पेक्टर प्रमोशन की प्रक्रिया सात साल से थमी हुई है।

दरअसल, वर्ष 2005 में तत्कालीन एडीजी कार्मिक बाबू लाल यादव ने एसएसपी नवनीत सिकेरा को दूसरे राज्यों की नियमावली अध्ययन के लिए भेजा था। इसके तहत दिल्ली, उत्तराखंड और हरियाणा व मध्य प्रदेश के अलावा महाराष्ट्र व आंध्र प्रदेश में एसआई से इंस्पेक्टर के पद पर प्रोन्नति की प्रक्रिया अध्ययन किया गया। डीजीपी मुख्यालय का मत है कि अब नई नियमावली बनाकर प्रमोशन की प्रक्रिया को सरल किया जाएगा, ताकि सपा के घोषणापत्र में शामिल वायदे को पूरा किया जा सके।

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