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मारिशस पहुंची मां गंगा की तड़प

वर्ल्ड भोजपुरी ऑर्गनाइजेशन के मारीशस इकाई की इंटरनेशनल हेड (आर्ट व कल्चर) हुशिला देवी रिसौलॅ ने कहा कि गंगा की वेदना, भारतीय सभ्यता, संस्कृति और अस्मिता की वेदना है। यदि गंगा न रहीं तो गोमुख से गंगा सागर तक की भारतीय सभ्यता का क्या होगा। अस्सी स्थित एक होटल में ऑर्गनाइजेशन के महासचिव अपूर्व नारायण तिवारी ने कहा कि गंगा की रक्षा में चलने वाली तपस्या के साथ ऑर्गनाइजेशन है।

हुशिला देवी ने कहा कि गंगा तट के ही लोग जो कभी गिरमिटिया मजदूर बनकर मारिशस गये थे, आज दुनिया के लिए मेहनतकशों का उदाहरण हैं। मारिशस के खून में भी गंगा का जल है। गंगा के लिए मारिशस सरकार से भी भारत सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास होगा। गंगा हमारी अस्मिता है। हमारी पहचान है। अपनी पहचान को बचाये रखने के लिए बलिदान से भी कदम पीछे नहीं हटाना होगा, यही भारतीय आन और सभ्यता है।

स्वच्छ निर्मल अविरल गतिशील गंगा अभियान में विश्व भोजपुरी संघ व इससे सम्बद्ध सभी इकाइयां साथ हैं।  समाज के प्रत्येक तबके से आह्वान है कि वह कदम उठाए, आवाज बुलंद करे और अपनी पहुंच के अनुरूप गंगा के लिए मौन सरकार के कान में मां गंगा की व्यथा सुनाए।

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