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एक रास्ता बंद होता है तो..

सुबह मीटिंग में जाने से पहले क्या मूड था! अपने प्रोजेक्ट को लेकर बल्ले-बल्ले थे वह। लेकिन बोर्ड ने उसे ‘रिजेक्ट’ कर दिया। अपनी दुनिया लुटती-सी महसूस हुई थी उन्हें। क्या-क्या सोचने लगे वह?

रिजेक्ट होने का दर्द तो होता ही है। रॉबर्ट ए. लीही का मानना है कि उस दर्द से खुद ही निजात पानी होती है। अगर उस दर्द में डूब गए, तो जिंदगी बर्बाद हो सकती है। सो, हर हाल में उससे उबरने की जरूरत होती है। वह वील कॉर्नेल मेडिकल कॉलेज में क्लीनिकल साइकोलॉजी के प्रोफेसर हैं। उनकी चर्चित किताब है, ‘द वरी क्योर।’

हम कामयाब होना चाहते हैं। शायद इसीलिए नाकामयाबी से डरते हैं। आखिर रिजेक्ट होना क्या है? वह एक किस्म की नाकामयाबी ही है न। और यही हम नहीं चाहते। लेकिन अगर ऐसे हालात में हम पड़ ही जाएं, तो हमें क्या करना चाहिए?

कभी-कभी जब हम किसी प्रोजेक्ट को लेकर बहुत उम्मीदें करते हैं, तो अटक जाने से बड़ा झटका लगता है। हम उससे कुछ ज्यादा ही जुड़ जाते हैं। वही ज्यादा जुड़ाव हमें परेशान करता है। हमें लगता है कि शायद जिंदगी में ही अब कुछ नहीं बचा है। आगे कोई रास्ता ही नजर नहीं आता।

ऐसा तो नहीं है कि सारे रास्ते ही बंद हो गए हैं। हालांकि बड़ा झटका लगने पर हमें महसूस ऐसा ही होता है। एक चीनी कहावत है कि एक रास्ता बंद होता है, तो हजार खुलते हैं। लीही भी यही कहना चाहते हैं कि एक ‘रिजेक्ट’ आपकी सारी जिंदगी पर हावी नहीं हो सकता। आखिर एक रास्ता ही तो बंद हुआ है। और न जाने कितने रास्ते हैं, जो हमारा इंतजार कर रहे हैं। हमने बस उस ओर रुख नहीं किया है। दरअसल, हम एक रास्ते में इतना खो जाते हैं कि दूसरा नजर ही नहीं आता। लेकिन जब ढूंढ़ने निकलते हैं, तो सब बदल जाता है। जरा उस ओर मुड़कर तो देखिए।

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