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माई नेम इज खान

अभिनेता शाहरुख खान को फिर एक बार अमेरिकी अधिकारियों ने हवाई अड्डे पर रोक लिया। शाहरुख येल विश्वविद्यालय में भाषण देने के लिए आमंत्रित किए गए थे और वह नीता अंबानी के साथ उनके निजी हवाई जहाज से अमेरिका पहुंचे थे। नीता अंबानी और अन्य लोगों को तो तुरंत जाने दिया गया, लेकिन शाहरुख खान को दो घंटे तक रोका गया। अक्सर जीवन में ऐसी घटनाएं होती हैं, जो कलाकारों की कल्पना में पहले साकार हो चुकी होती हैं। शाहरुख खान को भी यह लगा होगा कि उनकी फिल्म माई नेम इज खान का कोई दृश्य सचमुच घटित हो रहा है। इस घटना पर अमेरिकी सरकार ने माफी भी मांग ली और भारत सरकार ने यह शिकायत भी कर दी है कि अमेरिकी बार-बार इस तरह की हरकतें करते हैं और फिर माफी मांग लेते हैं। इन सबके बावजूद इस बात की कोई खास उम्मीद नहीं रखनी चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं नहीं होंगी। शाहरुख के मुताबिक, उनके साथ ही ऐसा तीन-चार बार हो चुका है, इसके अलावा पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम, पूर्व रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नाडिस, उद्योगपति अजीम प्रेमजी, अभिनेता कमल हासन जैसे कई नामी-गिरामी हिन्दुस्तानी हैं, जो अमेरिकी अधिकारियों के ऐसे रवैये का शिकार हो चुके हैं। ऐसे भारतीय जो इतने नामी-गिरामी नहीं हैं और जिनके साथ दुर्व्यवहार की कोई खबर नहीं छपती, उनकी तादाद तो हजारों में होगी। सिर्फ भारतीय ही नहीं, बल्कि लगभग सारे देशों के लोग इस रवैये का शिकार होते हैं, खास तौर पर जिनकी त्वचा का रंग यूरोपीय लोगों की तरह गोरा नहीं है या जिनके नाम से उनका मुस्लिम होना जाहिर होता है। समस्या यह है कि अमेरिकी सरकार ने अपने नागरिकों के लिए अलग नियम लागू कर रखे हैं और दूसरे देशों के नागरिकों के लिए अलग नियम हैं। अगर कोई अमेरिकी किसी अन्य देश में हत्या भी कर दे, तो अमेरिकी सरकार राजनयिक संरक्षण का कारण बता उसे उस देश के कानून से बचा लेती है, जैसा कि पिछले दिनों पाकिस्तान में हुआ था, जबकि उसमें अपराधी का राजनयिक होना भी संदेहास्पद था। इसके बरक्स अमेरिका में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं कि वैध राजनयिक वीजा वाले लोगों को भी राजनयिक संरक्षण नहीं दिया गया और आम अमेरिकी कानूनों के दायरे में उन पर मुकदमा चलाया गया। अमेरिका में पूर्व राजदूत मीरा शंकर और संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरप्रीत पुरी भी अमेरिकी अधिकारियों की ज्यादतियों को झेल चुके हैं।

इस अमेरिकी व्यवहार की एक वजह तो दुनिया की एकमात्र महाशक्ति होने का अहसास है। इसके अलावा एक बड़ी समस्या यह हुई कि 9/11 की आतंकवादी घटना ने अमेरिका को हिला दिया। अमेरिकी काफी लंबे वक्त तक आतंकवादियों से सारी दुनिया में अच्छे-बुरे रिश्ते बनाते रहे, इसके बावजूद उन्हें विश्वास था कि आतंकवादी अमेरिकी सीमा से दूर ही रहेंगे। अमेरिका में 9/11 की घटना ने सुरक्षा के बारे में अमेरिकियों को कुछ ज्यादा ही शक्की बना दिया। इसके अलावा जो कुछ शाहरुख खान या दूसरे नामी लोगों के साथ हुआ, उसकी एक और वजह दिखती है। शायद वे जान-बूझकर ऐसे लोगों को रोकते हैं, ताकि विवाद पैदा हो सके। बाद में माफी मांग विवाद निपटा देते हैं, इससे यह संदेश जाता है कि अमेरिकी सुरक्षा के मामलों में कितने सख्त हैं। शायद इस अतिरिक्त चौकसी से वे अपने देश को आतंकवाद से बचाने में कामयाब हो रहे हों, लेकिन सारी दुनिया में अमेरिकी सरकार की छवि अच्छी नहीं बन रही है। फिलहाल अपनी ताकत और समृद्धि के बूते वे ऐसा व्यवहार करके बच निकल रहे हों, लेकिन हमेशा ऐसे ही हालात रहेंगे, क्या इसकी कोई गारंटी है?

 

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  • Web Title:माई नेम इज खान