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बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट (30 मार्च से 5 अप्रैल)

जैसी फिल्में-वैसा नतीजा। सही मायने में लोकतंत्र तो टिकट-खिड़की पर ही पाया जाता है। एक कामयाब फ्रेंच फिल्म पर आधारित ‘बंबू’ में ऐसा कुछ नहीं था कि दर्शक इसे देखने की जहमत उठाते। सच तो यह है कि जिन लोगों ने इसे देखा, उन्हें कोई अवॉर्ड दिया जाना चाहिए। जिन सिनेमाघरों में यह लगी, उनमें से ज्यादातर ने इसे दर्शकों की कमी के चलते उतार दिया। पूरे हफ्ते का कलेक्शन कुछ एक लाख रुपए ही रहा। हर प्रिंट से औसतन कलेक्शन महज 16 हजार रुपए रहा, जो बेहद शर्मनाक है। इसके साथ आई भट्ट कैंप की कुणाल खेमू वाली ‘ब्लड मनी’ को खाली मैदान का फायदा हुआ, वरना फिल्म तो यह भी कुछ खास नहीं थी। कम बजट के कारण इसने पहले सप्ताह में जो साढ़े आठ करोड़ रुपए बटोरे, वे भी इसके लिए काफी ही कहे जाएंगे। हर सिनेमाघर से इसने औसतन 1 लाख 43 हजार रुपए इकट्ठे किए, जो इसे औसत ही करार देते हैं। अब यह अलग बात है कि इसकी रिलीज का पहला हफ्ता पूरा होते ही इसे बनाने वालों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था। इसके साथ आई ‘झांसी की रानी’ तो आते ही शहीद हो गई। जिस फिल्म के आने की आहट तक न हो, उसे कोई पूछे भी तो क्यों? सैफ अली खान की ‘एजेंट विनोद’ दूसरे सप्ताह में करीब पांच करोड़ रुपए बटोर रही थी। ‘कहानी’ चौथे हफ्ते में और ‘पान सिंह तोमर’ पांचवें हफ्ते में भी अच्छी कमाई कर गई।

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  • Web Title:बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट (30 मार्च से 5 अप्रैल)