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दूसरी हरित क्रांति के लिए 1000 करोड़ रुपये कम: नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वित्तीय वर्ष 2012-13 के केंद्रीय बजट में दूसरी हरित क्रांति के लिए पूर्वी राज्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये के बजट को शुक्रवार को अत्यंत कम बताया।

मुख्यमंत्री ने श्रीविधि से खेती के लिए 2012 के अभियान के उदघाटन कार्यक्रम में कहा कि हमें केंद्रीय बजट से बहुत आशाएं थी। केंद्रीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी के बजट में पूर्वी राज्यों के लिए 1000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है। पांच राज्यों में से बिहार को हिस्से के रूप में 80 से 100 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे जबकि हम अपने कृषि रोड़मैप पर 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने की महत्वाकांक्षी योजना बनाये हुए हैं। केंद्रीय मदद ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर भी नहीं है।

बिहार में टिकाऊ कृषि को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता करार देते हुए नीतीश ने कहा कि हमारा जोर टिकाऊ खेती पर रहेगा। बिहार एक बार फिर कृषि माडल के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनेगा। धान की आवक की पद्धति को केंद्र ने माडल मानते हुए दिल्ली से आये अधिकारियों ने अन्य राज्यों को इसे अपनाने को कहा है।

उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र मे आत्मनिर्भर बनने के साथ हम बाहर लोगों के लिए उत्पादन करना चाहते हैं। वर्तमान में जैविक खेती का समय है और हम गुणवत्तापूर्ण कषि उत्पाद के लिए जैविक खेती को बढा़वा देंगे। इससे हर हिंदुस्तानी की थाली में बिहार के एक व्यंजन का सपना पूरा होगा।

नीतीश ने कहा कि प्रथम हरित क्रांति के दुष्परिणाम से सबक लेते हुए राज्य में दूसरी हरित क्रांति के लिए टिकाऊ खेती पर जोर दिया जाएगा। यही बिहार की रणनीति होगी जिससे 2012-17 के कृषि रोड़ामैप में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि हम अपनी खेती में मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ने नहीं देंगे।

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