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अमीर स्कूलों में पढ़ेंगे गरीब बच्चे

सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में शिक्षा के अधिकार कानून को संवैधानिक ठहराया है। इसके बाद सभी स्कूलों को कमजोर वर्ग के बच्चों को 25 फीसदी आरक्षण देना होगा। कानून सभी सरकारी, वित्तीय सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त निजी, सहायता प्राप्त अल्पसंख्यक व बोर्डिंग स्कूलों पर लागू होगा।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एसएच कपाड़िया, स्वतंतर कुमार तथा केएस राधाकृष्णन की तीन सदस्यीय पीठ ने गुरुवार को अपने फैसले में यह भी कहा कि कानून की जद से वही अल्पसंख्यक स्कूल बाहर रहेंगे जो सरकारी सहायता नहीं लेते।

यह फैसला गुरुवार से लागू हो गया। जिन स्कूलों में दाखिले हो चुके हैं, वहां कानून अगले वर्ष से लागू होगा। पीठ में एक जज जस्टिस राधाकृष्णन का हालांकि एक मुद्दे पर अलग मत था। उन्होंने कहा कि कानून गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों के अधिकारों का उल्लंघन करता है। इसलिए उन पर लागू नहीं होगा। लेकिन इस मत का कोई मूल्य नहीं है, क्योंकि दो जजों ने बहुमत से इसे सभी स्कूलों के लिए बाध्य बताया है।
कोर्ट ने यह फैसला देश भर के निजी स्कूलों की याचिका पर दिया। याचिका में शिक्षा के अधिकार कानून, 2009 को असंवैधानिक बताते हुए चुनौती दी थी। उनका कहना था कि सरकार यह कानून उन स्कूलों पर नहीं थोप सकती जो सहायता नहीं लेते। सुप्रीम कोर्ट की 11 जजों की संविधान पीठ (टीएमए पाई केस) व्यवस्था दे चुकी है कि शैक्षिक संस्थान चलाना व्यवसाय है, जिसे अनुच्छेद 19 (1) (जी) के तहत मौलिक अधिकार माना गया है। 

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