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डेढ़ माह की मासूम को छोड़ा लावारिस

दिल्ली की फलक (बदला हुआ नाम) और बेंगलुरु की आफरीन के दुखद अंत को अभी लोग भूल भी नहीं पाए कि गुड़गांव में एक बच्ची की इसी से मिलती कहानी सामने आ गई। यहां के सिविल अस्पताल में एक डेढ़ माह की बच्ची लापता हालत में मिली है।

डॉक्टरों ने बताया कि अस्पताल में बरगद पेड़ के पास से गुजरते हुए एक मरीज की नजर पेड़ के नीचे इस बच्ची पर पड़ी। फौरन बच्ची को बच्चा वार्ड में भर्ती करवाया गया। बच्ची की देखभाल कर रही डॉक्टर विन्नी ने बताया कि उसका वजन चार किलो है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। भूख से तड़पती बच्ची ने बोतल से दूध भी पिया। पीएमओ असरुद्दीन ने बताया कि सेक्टर-15 थाने में मेडिकल लीगल रिपोर्ट दर्ज करवा दी गई है। 

बच्ची ने अच्छे कपड़े पहने हुए हैं। उसकी हालत से माना जा रहा है कि अब तक उसका पालन-पोषण ढंग से हुआ है। आशंका यह भी है कि बेटे की चाहत रखनेवाले किसी ने मौका पाकर बच्ची को त्याग दिया है। बेटों के प्रति मोह का हाल यह है कि चिकित्सीय उपेक्षा के कारण देश में जन्म लेने वाली हर एक हजार लड़कियों में से 52 लड़कियां जन्म के बाद दूसरा दिन नहीं देख पाती हैं। जबकि लड़कों के मामले में यह संख्या 49 है। इसी तरह देश में जन्म से लेकर छह साल तक की उम्र में प्रति एक हजार लड़कों पर 914 लड़कियां रह गई हैं।

 

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