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शादी का पंजीकरण कराना होगा आसान

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक महत्वपूर्ण फैसले में शादी के रजिस्ट्रेशन को जरूरी कर दिया है। अब सभी धर्मों के विवाहों को पंजीकृत कराना होगा, इसके साथ ही सिखों के विवाह यानी आनंद कारज को मान्यता देने के लिए अधिनियम में संशोधन किया जाएगा।

प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि शादी के पंजीकरण से महिलाओं को उत्पीड़न से बचाया जा सकेगा। यह पूछने पर कि क्या पंजीकरण अनिवार्य होगा, उन्होंने कहा कि विधेयक जब संसदीय समिति के पास जाएगा तो इन मुद्दों पर निर्णय लिया जाएगा।

फिलहाल देश में 10-15 फीसदी शादियां ही पंजीकृत होती हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साल 2006 के सीमा बनाम अश्विनी कुमार मामले में केंद्र एवं राज्य सरकारों को निर्देश दिया था कि सभी नागरिकों के विवाहों का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए। अदालत ने यह भी कहा था कि यह व्यवस्था सभी धर्मों के नागरिकों के लिए होनी चाहिए। अब सरकार ने फैसला किया है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण अधिनियम 1969 में संशोधन करके विवाहों के पंजीकरण का प्रावधान जोड़ा जाएगा। 

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