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नई नौकरी है कहीं फिसल न जाएं

तेजी से बदलते और बढ़ते बाजार में अपनी मौजूदगी को प्रभावी बनाना चाहते हैं तो निरंतर विकास की ओर ध्यान देना जरूरी होगा। खासतौर पर यदि आप फ्रेशर हैं तो वर्कप्लेस संबंधी सामान्य नियमों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना तरक्की को आप से दूर ले जाता है। ऐसे में जरूरी है कि कार्यकुशल होने के साथ-साथ आप व्यवहार कुशल भी बनें। प्रोफेशनल करियर को बढ़ावा देने के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है, बता रहे हैं विजय मिश्र।

यदि आप नौकरी कर रहे हैं तो अपना काम प्रभावी ढंग से करने के लिए कार्यस्थल संबंधी नियमों का पालन करना जरूरी होता है। कंपनी भले ही छोटी हो या बड़ी, आप देश में काम कर रहे हों या विदेश में, वर्कप्लेस संबंधी व्यवहार जिसे कोड ऑफ कंडक्ट कहा जाता है, उसे हर स्तर पर ध्यान रखना जरूरी होता है। नोएडा स्थित एक मल्टीनेशनल फर्म के एचआर विभाग में काम करने वाली मिताली शर्मा के अनुसार, अक्सर नौकरी मिलने के बाद युवा उम्मीदवार सामान्य नियमों का पालन करने में लापरवाही बरतने लगते हैं, जो उनके लिए महंगा साबित होता है। ऑफिस देर से आना, ऑफिस फोन से पर्सनल बातें करना, निजी काम के लिए वहां के प्रिंटर या फोटो कॉपियर का इस्तेमाल करना, अपनी कंपनी की जानकारी दूसरे प्रतियोगियों से शेयर करना आदि कुछ ऐसी बाते हैं, जो कर्मचारी का अच्छा काम होने के बावजूद उसकी छवि बिगाड़ देती हैं।’
     
अमूमन सभी बड़ी कंपनियों में वर्कप्लेस संबंधी स्पष्ट नीति बनाई जाती है, जिसके बारे में उम्मीदवार को जॉइनिंग के समय बता दिया जाता है। मिताली के अनुसार, ‘यदि कंपनी में कोई स्पष्ट निर्देशावली नहीं है तो उम्मीदवार के लिए वरिष्ठ अधिकारियों से इस संबंध में जानकारी लेना अच्छा रहता है। आमतौर पर सामान्य नियमों की लापरवाही किए जाने पर कोई भी कदम उठाने से पहले एचआर विभाग उम्मीदवार को समझाता है। बेहतर होता है कि फ्रेशर्स न सिर्फ अपने काम को प्रभावी बनाने पर ध्यान दें, बल्कि खुद को ग्लोबल परिवेश के अनुसार भी तैयार करें। उम्मीदवार की अच्छी प्रोफेशनल छवि उसके एक्सपोजर को कई गुणा बढ़ा देती है।’
 
यूं सुधारे अपनी प्रोफशनल छवि
कल्चरल नॉलेज: वक्त के साथ-साथ मार्केट की डिमांड भी बदलती रहती है। जहां 1980 के दशक में आई क्यू यानी इंटेलिजेंस कोशेंट को महत्वपूर्ण माना जाता था, वहीं 1990 के आसपास इक्यू (इमोशनल इंटेलिजेंस कोशेंट) का बोलबाला रहा, लेकिन वर्तमान में ग्लोबल मैनेजर सी क्यू (कल्चरल कोशेंट) को तरजीह दी जा रही है। इसका मतलब यह हुआ कि अगर आपको अपना एक्सपोजर बढ़ाना है तो अपने साथ काम करने वालों की सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को अवश्य समझने का प्रयास करें। यही वह फील्ड है, जिसके सहारे आप दूसरे पक्ष के साथ तेजी से कम्युनिकेशन स्थापित कर सकते हैं। मान लीजिए आपका नया बॉस देश के किसी ऐसे प्रांत से है, जहां के बारे में आप बिल्कुल वाकिफ नहीं हैं या आप खुद किसी दूसरे प्रांत में नौकरी करने के लिए गए हैं, जहां का सांस्कृतिक परिवेश बिल्कुल भिन्न है तो आपकी बातचीत का दायरा भी सीमित हो जाता है। साथ ही आप जाने-अनजाने उनकी भावनाओं को ठेस भी पहुंचा सकते हैं। ऐसे समय में जहां कार्यस्थल पर एक साथ कई संस्कृति के लोग काम कर रहे हों, आपकी कल्चरल जानकारी बातचीत के नए द्वार खोलती है, साथ ही उम्मीदवार का व्यक्तित्व भी प्रभावी बनता है।

हाजिरजवाबी हमेशा कामयाब नहीं: किसी बात को समझ कर तुरंत उसका उचित उत्तर देना अकसर आपकी इमेज को दूसरों के सामने मजबूती से पेश करता है। माना जाता है कि अगर कोई त्वरित जवाब देने में माहिर है और वो भी सटीक तो उसका आई क्यू लेवल भी बेहतर होगा। लेकिन ये जान कर आपको हैरानी होगी कि कई जगहों पर आपकी ये आदत परेशानी का सबब भी बन सकती है। एक सर्वे के मुताबिक एशियाई महाद्वीप के लोग हाजिर जवाब लोगों से किनारा करते हैं और इनके बारे में निगेटिव एप्रोच भी रखते हैं। यह जानना भी जरूरी है कि हर देश व  क्षेत्र के हिसाब से लोग हंसी-मजाक और हाजिर जवाबी को लेकर संजीदा रहते हैं। वर्कप्लेस पर हंसी-मजाक सामने वाले की पसंद-नापसंद पर निर्भर होती है, ना कि आपके सेंस ऑफ ह्यूमर पर।

इंटरनेट नहीं, इटेलिजेंट यूजर्स बनिए: साइबर संसार की खूबियां किसी से छुपी नहीं हैं, पर कार्यस्थल पर इंटरनेट इस्तेमाल करते समय कंपनी की पॉलिसी का ध्यान रखना भी जरूरी है। एक मीडिया कंपनी के तकनीकी विभाग में काम करने वाले अखिलेश श्रीवास्तव के अनुसार, ‘कई बार ऐसा भी होता है कि जो मैटर या कंटेंट आप इंटरनेट से अपने उद्देश्य के लिए उठा रहे हैं, उस पर किसी का कॉपीराइट या विशेषाधिकार होता है। आप किसी कानूनी पचड़े में न फंसें, इसके लिए जरूरी है कि आप ऑफिशियल कंटेंट के बारे में वरिष्ठ कर्मियों से जानकारी हासिल करें।  किसी भी आधिकारिक सूचना को अन्य संगठन या प्रतियोगी पक्ष के साथ शेयर न करें। मिताली के अनुसार, ‘सबसे बड़ी लापरवाही सोशल नेटवर्किंग साइट्स या वीडियो डाउनलोड के संबंध में देखने को मिलती है।
आमतौर पर बड़ी कंपनियों में कर्मियों की ऑनलाइन गतिविधियों की स्क्रीनिंग के लिए एक तकनीकी विभाग होता है। यहां तक कि आधिकारिक डाटा की शेयरिंग या लंबे समय तक इंटरनेट का गलत इस्तेमाल नौकरी से हाथ धोने का कारण भी बन जाता है।’

व्यवहार: वर्कप्लेस पर आपकी परफॉर्मेस सिर्फ तय किए गए टारगेट पर आधारित नहीं होती, आपके व्यक्तिगत व्यवहार पर भी निर्भर करती है। जहां ऑफिस वर्क करने वालों के लिए अपने सहकर्मियों के साथ व्यवहार उनके भविष्य की रूपरेखा तय करता है, वहीं फील्ड पर रहने वालों पर दोहरा दबाव होता है। क्लाइंट्स के साथ आपका अच्छा व्यवहार और समस्याओं का समाधान करने का आपका प्रयास हमेशा सराहनीय माना जाता है। वरिष्ठ अधिकारी व सहकर्मी आपके मुरीद बने, इसके लिए जरूरी होगा कि आप स्पष्ट और विनम्रतापूर्वक बात करें। कोई गलती होने पर उसका आरोप दूसरों पर न डालें।

टीम वर्क है सबसे जरुरी 
किसी भी जीत में पूरी टीम का योगदान होता है। ऑफिस ऐसी जगह है, जहां हर कर्मी अकेले काम करते हुए भी बतौर एक टीम ही कार्य करता है। ध्यान रखें कि अकेले काम करते वक्त भी टीम भावना का सम्मान किया जाए। ट्रेनिंग कंसल्टेंट शीतल कक्कड़ मेहता की किताब ‘बिजनेस एटीकेट्स : ए गाइड फॉर द इंडियन प्रोफेशनल्स’ बुक में इस बात पर खास फोकस किया गया है कि यदि आप ऑफिस में फुर्सत में हैं तो भी यह ध्यान रखें कि आपके सहकर्मी जरूरी काम में व्यस्त हो सकते हैं। इसलिए अपने आराम के समय को सबके आराम का समय ना समझों। जहां तक संभव हो, वर्कप्लेस पर कम से कम बातचीत करें। सीट पर अधिक शोर न करें।

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