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12 लाख बच्चों को नहीं मिलीं किताबें

नये शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होते ही राजधानी के सभी सरकारी व निजी स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो गईं। लेकिन दिल्ली नगर निगम के स्कूल में पढ़ने वाले लाखों बच्चों को अब तक न तो किताबें दी गईं और न ही कॉपी। इतना ही नहीं, निकट भविष्य में बच्चों को किताबें मिलने की कोई संभावना भी नहीं दिख रही क्योंकि दिल्ली सरकार व निगम की आपसी लड़ाई में किताब छापी ही नहीं गई हैं। हाईकोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए दिल्ली सरकार की कड़ी खिंचाई की है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ए.के. सीकरी व न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंडलॉ की पीठ ने इस मामले को हैरान करने वाला बताया है। पीठ ने कहा, ताज्जुब है कि ऐसा सब देश की राजधानी में हो रहा है। जहां कक्षाएं शुरू हो गईं लेकिन लाखों बच्चों को किताबे नहीं दी गईं। हाईकोर्ट ने इसे सरकार का सॉरी स्टेट अफेयर्स बताया और इसे कभी स्वीकार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने साफ कर दिया कि बच्चों के भविष्य से किसी को खिलवाड़ नहीं करने दिया जाएगा। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दो दिन के भीतर यह बताने को कहा है कि लाखों बच्चों को कब तक किताबें मुहैया करा दी जाएंगी।

हाईकोर्ट में बुधवार को यह मामला अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने उठाया। उन्होंने कहा कि नगर निगम के स्कूलों में कक्षाएं शुरू हो गईं लेकिन बच्चों को अबतक किताबें मुहैया नहीं कराई गईं। साथ ही कहा कि इसका असर दिल्ली सरकार के प्राथमिक स्कूल पर भी है। उनके इस आरोप को दिल्ली नगर निगम की ओर पेश अधिवक्ता मनिंदर अचार्य ने भी स्वीकार किया। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि बच्चों को किताबें इसलिए मुहैया नहीं कराई जा सकी हैं क्योंकि अब तक दिल्ली टेक्सट बुक ब्यूरो ने किताबें प्रकाशित नहीं की हैं।

निजी स्कूल तो अपने छात्रों के लिए किताबें वेबसाइट से भी प्रिंट करा लेने की व्यवस्था कर रहे हैं, आखिर ऐसे व्यवस्था सरकार क्यों नहीं कर सकती।
जस्टिस राजीव सहाय एंडलॉ, जज हाईकोर्ट

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