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आंगनबाडी केन्द्रों का ठीक से नहीं हो रहा है संचालन

कुपोषित बच्चों और महिलाओं की सेहत सुधारने के साथ ही उनकी शिक्षा के लिए अरबों रुपये पानी की तरह बहाने के बावजूद न तो आंगनबाडी केन्द्र ठीक से संचालित हो रहे हैं और न ही उनकी निगरानी हो पा रही है।

आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में पिछले पांच सालों से लगी भर्ती पर रोक के कारण मुख्य सेविकाओं की भारी कमी है जबकि केन्द्र सरकार लगातार राज्य सरकार को इस बात के लिए राजी करती रही है कि आंगनबाडी़ केन्द्रों का संचालन सुचारु हो सके लेकिन राज्य में दस हजार से अधिक केन्द्र महज इसलिए संचालित नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि यहां आंगनबाडी कार्यत्रियों की तैनाती नहीं है।

राज्य में 166073 आंगनबाडी और 22186 मिनी आंगनबाडी केन्द्र स्वीकृत हैं। इस तरह लगभग पौने दो लाख आंगनबाडी केन्द्रों की निगरानी के लिए 6643 मुख्य सेविकाओं के पद स्वीकृत हैं। हर मुख्य सेविका को 25 केन्द्रों की नियमित निगरानी करने के निर्देश हैं लेकिन इस समय उनके 2650 पद खाली हैं।

चार हजार दो सौ पैसठ आंगनबाडी और 4671 मिनी आंगनबाडी, इसके अलावा 6422 सहायिकाओं के पद भरे जाने बाकी हैं। निदेशालय बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने लगभग एक वर्ष पूर्व छह अप्रैल 2011 को 2132 पद पद सीधी भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया था जबकि शेष पदों पर आंगनबाडी कार्यकत्रियों को प्रोन्नति दी जानी थी।

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