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गाजीपुर में तैयार होंगे होनहार तीरंदाज

गाजीपुर। मनीष जायसवाल

संसाधनों के अभाव में दम तोड़ती तीरंदाजी प्रतिभाओं को अब आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता। सतीश और अविनाश सरीखे होनहार तीरंदाजों की देखरेख में जिले में नयी पौध को पुष्पित-पल्लवित किया जायेगा। अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाज सतीश दूबे की सराहनीय पहल से सबकुछ संभव हो सका। जल्द ही जमानियां में पूर्वाचल का पहला तीरंदाजी प्रशिक्षण संस्थान खुलेगा। यूपी फील्ड आर्चरी एसोसिएशन ने भी इसे हरी झंडी दे दी है। अब वह दिन दूर नहीं जब लक्ष्य पर अचूक निशाना साधकर मेडल बटोरने वाले प्रतिभावान खिलाडिम्यों की जमात गाजीपुर में होगी।क्रिकेट, हॉकी, कुश्ती, बैड़ािंटन, एथलेटिक्स, निशानेबाजी सहित अन्य खेलों के प्रशिक्षण के लिए तो तमाम संस्थाएं हैं, लेकिन तीरंदाजी को इस क्षेत्र में कोई खास प्रोत्साहन नहीं मिला है। इस कला में रुचि रखने वाले खिलाडिम्यों को या तो सोनभद्र में संचालित स्पोर्ट्स हॉस्टल जाना पड़ता है या फिर उन्हें सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय से कोचिंग करनी पड़ती है। इन सरकारी संस्थाओं की सीमित सीटों पर प्रवेश में विभिन्न प्रकार की बाध्यताओं से ज्यादातर खिलाडिम्यों को जगह नहीं मिल पाती है। ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाएं खुद के भरोसे महंगे उपकरण व अन्य संसाधन जुटाने में सक्षम नहीं होते। नतीजा न चाहते हुए भी उन्हें अपनी इच्छा और प्रतिभा को वहीं दफन करना पड़ता है।

तीरंदाजी के ऐसे तमाम खिलाड़ी मिल जायेंगे जो प्रतिभावान होने के बाद भी संसाधनों के अभाव में आगे नहीं बढ़ पाये।खिलाडिम्यों के सामने इन चुनौतियों को महसूस करते हुए अंतर्राष्ट्रीय तीरंदाज और फिलहाल सेना में हवलदार पद पर कार्यरत सतीश दूबे ने सराहनीय पहल की है। जमानियां तहसील के लोकवां-टोकवां गांव निवासी नन्दू दुबे के पुत्र सतीश ने जिले में ही तीरंदाजी प्रशिक्षण संस्थान खोलने की तैयारी शुरू कर दी है।

डिस्ट्रिक्ट आर्चरी एकेड़ाी के रूप में संस्था का पंजीकरण पूरा हो गया है। इसे यूपी फील्ड आर्चरी से हरी झंडी भी मिल गयी है। जल्द ही जमानियां नगर में यह संस्थान मूर्त रूप ले लेगा। जिले में ही तीरंदाजी संस्थान खुलने से ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को तो आगे बढ़ने का मौका मिलेगा ही अन्य जनपदों से भी प्रशिक्षण लेने खिलाड़ी यहां पहुंचेंगे।

जिले में हैं तीरंदाजी के दो चैम्पियनतीरंदाजी के क्षेत्र में जिले का बड़ा नाम है। यहां के दो खिलाड़ी नेशनल चैम्पियन हैं। जमानियां के लोटवां-टोकवां निवासी सतीश दूबे को जूनियर नेशनल आर्चरी चैम्पियनशिप की 30 मीटर स्पर्धा में नेशनल रिकार्ड के साथ दो गोल्ड मेडल हासिल किये थे। पिछले दिसंबर माह में इण्डोर वर्ल्ड आर्चरी चैम्पियनशिप सिंगापुर में 24वां रैंक प्राप्त किया। आठ बार यूपी टीम में अव्वल स्थान पर रहे।

वहीं फुल्ली के अविनाश ने जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप में गोल्ड व नेशनल गेम्स में यूपी की टीम की ओर से हिस्सा लेते हुए सिल्वर मेडल प्राप्त किया था।निशा की बदहाली देख मिली प्रेरणाजिले में तीरंदाजी का प्रशिक्षण केन्द्र स्थापित करने के लिए सतीश को प्रेरणा केन्द्रीय खेलमंत्री अजय माकन के झारखंड दौरे के समय मिली। इस दौरे में ही आर्चरी की राज्य स्तरीय खिलाड़ी निशा दत्ता की बदहाली उजागर हुई थी। गरीबी-तंगी के आगे विवश निशा ने प्रोत्साहन के अभाव में अपने धनुष व मेडल बेच दिये थे।

बस इसके बाद सतीश ने फैसला कर लिया कि ऐसा माहौल तैयार किया जाये, जिससे खिलाड़ी को आगे बढ़ने में अड़चन न आये। बताया जमानियां आर्चरी प्रशिक्षण सेंटर खोलने के लिए जगह की तलाश जारी है। खिलाडिम्यों को प्रशिक्षण के लिए जरूरी संसाधन वह स्वयं मुहैया करायेंगे और अपने अलावा पुराने तीरंदाजों को कोचिंग के लिए लायेंगे।

खेल विभाग भी सतीश के साथगा जीपुर। सतीश दूबे की इस पहल को जिला खेल विभाग ने भी हाथों-हाथ लिया है। जिला क्रीड़ा अधिकारी एके सिंह ने बताया कि सतीश ने उनसे भी संपर्क किया है।

तीरंदाजी के संस्थान अमूमन पश्चिमी यूपी में हैं। पूर्वाचल के सोनभद्र में ही खेल विभाग का तीरंदाजी प्रशिक्षण केन्द्र है। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विवि में प्रशिक्षण की व्यवस्था है। इसके अलावा अन्य जनपदों में तीरंदाजी प्रशिक्षण के लिए कोई इंतजाम नहीं है। कहा कि व्यक्तिगत स्तर पर किये जा रहे इस सराहनीय प्रयास को अंजाम तक पहुंचाने में पूरी मदद की जायेगी। तीरंदाजी प्रशिक्षण केन्द्र के संचालन में विभाग के स्तर से जो संभव जरूरत पड़ेगी, प्रदान की जायेगी। ं

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