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सूबे की महज 38% भूमि पर सिंचाई सुविधा

रांची राजीव

तमाम कोशिशों के बावजूद झारखंड कीमहज 38 फीसदी कृषि योग्य भूमि पर सिंचाई की सुविधा बहाल पाई है। हालांकि सरकार ने वर्षवार लक्ष्य निर्धारित कर 2017 तक राष्ट्रीय औसत छूने का वर्कप्लान तैयार किया है। फिलहाल राष्ट्रीय औसत 67.24 फीसदी है। 2008 में तो महज 28 फीसदी भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा थी। इसके लिए सिंचाई के विभिन्न माध्यमों पर सरकार ने फोकस किया है। इसमें चेकडैम, कुआं, तालाब पर ध्यान दिया गया है।सिंचाई पर 433 करोड़ खर्च : चालू वित्तीय वर्ष में सिंचाई पर 433 करोड़ रुपए खर्च किए जाने हैं।

इससे 1394 चेकडैम का निर्माण कार्य पूर्ण करने और 220 करोड़ की लागत से 1208 सिंचाई योजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य है। इससे करीब 80346 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई की सुविधा मिल पाएगी।843 चेकडैम का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा : चालू वित्तीय वर्ष में 843 सीरीज चेकडैम का प्रस्ताव केंद्र को भेजा जाएगा। इस पर झाखंड सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। योजना धरातल पर उतरी तो 65163 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का सृजन हो सकेगा। वर्षवार वर्क प्लानसाल प्रतिशत 2012 38.092013 42.562014 47.602015 57.992016 62.862017 67.20 एक नजर’ राज्य का भौगोलिक क्षेत्र : 79.714 लाख हेक्टेयर’ वन क्षेत्र भूमि : 23.605 लाख हेक्टेयर’ कृषि योग्य भूमि : 29.74 लाख हेक्टेयर’ सिंचाई की सुविधा वाली भूमि : 9.23 लाख हेक्टेयर विगत चार वर्षों से सिंचाई की सुविधा बहाल करने पर विशेष जोर दिया गया है। 2017 तक राष्ट्रीय औसत पाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए वर्षवार योजनाएं बनाई गई हैं। अधिकारियों को तय लक्ष्य के अनुसार ही काम करने का निर्देश दिया गया है। सुदेश कुमार महतो, डिप्टी सीएम

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