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कैंसर मरीजों के लिए करूंगा काम, किताब भी लिखूंगा

अमेरिका में कैंसर का इलाज कराकर लौटने के बाद बुधवार को पहली बार मीडिया से रूबरू हुए युवराज सिंह ने बीमारी, इलाज के अनुभव और भविष्य की योजनाओं के बारे में बताया। इस खतरनाक बीमारी को हराने के बाद युवराज अब भारत में कैंसर के मरीजों की मदद के लिए काम करना चाहते हैं। इस बीमारी से पीड़ित लोगों का मनोबल बढ़ाने के लिए वह अपने अनुभवों पर किताब भी लिखेंगे। 

विश्वास नहीं हुआ कैंसर है
पहले तो विश्वास नहीं हुआ कि मुझे कैंसर है। बीमारी के दौरान बहुत तकलीफ होती थी। लगातार खांसी और उल्टी होती। खांसते-खांसते खून आ जाता। लेकिन मैंने अपने दर्द के बारे में किसी को पता नहीं चलने दिया। विश्वकप के दौरान तबीयत ठीक नहीं थी। सांस लेने में तकलीफ होती थी। फिर भी मैं खेला और देश के लिए विश्वकप जीता।

दो ही रास्ते थे मेरे पास
कीमोथेरेपी के बाद डिप्रेशन आम बात है। मेरे पास दो ही रास्ते थे। लड़ता या डिप्रेशन में चला जाता। मैंने लड़ने का फैसला किया। मां के साथ और साइक्लिस्ट लांस आर्मस्ट्रॉन्ग से मुझे काफी हिम्मत मिली।

क्रिकेट नहीं देखता था 
इलाज के दौरान दिनचर्या काफी संयमित होती थी। ज्यादातर हाई प्रोटीन तरल पदार्थ लेता था। सुबह सैर पर जाता। वक्त काटने के लिए वीडियो गेम्स खेलता या कभी-कभी मॉल में घूमने जाता। इस दौरान क्रिकेट बिल्कुल नहीं देखता था। क्योंकि मैदान में खुद को न पाकर मायूसी होती।

सचिन से मिलकर खुशी हुई
सचिन तेंदुलकर ने लगातार हौसला बढ़ाया। मैं उनके संपर्क में था। लंदन में वह मिलने आए तो बेहद खुशी हुई। इसका अफसोस है कि उनके सौवें शतक पर टीम के साथ नहीं था।

देश के लिए फिर खेलूंगा
मैं जानता हूं यह मुश्किल होगा। लेकिन मैं मैदान पर उतरूंगा और एक बार फिर देश के लिए खेलूंगा। यदि ऐसा कर सका तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। 

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