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इजरायल की जिद और गुंटर ग्रास का ‘बयान’

एक ऐसे समय में, जब अमेरिका और उसके सहयोगी यूरोपीय देश एक सुर में ईरान की घेरेबंदी किए हुए हैं, तब इन्हीं देशों से इस रवैये के विरोध में तीखी प्रतिक्रियाएं भी देखने-सुनने में आ रही हैं। अमेरिका की दबाव डालने की प्रवृत्ति पर कई जन-संगठन आवाजें उठाते रहे हैं, आमतौर पर चुपचाप रहने वाले जर्मन समाज में भी इस मुद्दे पर कुछ  आलोड़न उठा है। इस आलोड़न की एक नजीर है, जर्मन कवि गुंटर ग्रास की ताजा कविता, जो एक सीधा-सपाट बेलाग बयान सरीखी है। गुंटर ग्रास नोबेल पुरस्कार से सम्मानित जर्मनी के बेहद लोकप्रिय कवि हैं और पिछले कुछ समय से गैर लेखकीय वजहों से विवादों में रहे हैं।
उन पर नात्सी हुकूमत की छात्र शाखा में काम करने का आरोप है। जिसे ग्रास ने कभी झुठलाया नहीं। द ट्रिन ड्रम  जैसे उपन्यास के लेखक ग्रास भारत से भी काफी प्रभावित रहे हैं और कोलकाता, बनारस भी आ चुके हैं। ग्रास नात्सीवाद के सबसे प्रचंड आलोचकों में से रहे हैं। उनकी ताजा कविता में इजरायल की तीखी आलोचना इसीलिए मामले को सरलीकृत कर देखने वालों को चौंका रही है। अस्सी पार की उम्र में उन्होंने एक ऐसे मुद्दे पर अंगुली रखी है, जिससे जर्मन सत्ता व्यवस्था चौंक गई है और इजरायली हुकूमत आग-बबूला है। ग्रास ने करीब 70 लाइनों वाली अपनी कविता जो कहा जाना चाहिए में इजरायल के एटमी मंसूबों पर तीखी चोट की है और कहा है कि अपनी हरकतों से इजरायल अपने परमाणु जखीरे का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ करने को उत्सुक नजर आता है। ग्रास ने जर्मनी सरकार की आलोचना की है कि आखिर क्यों युद्ध पर आमादा दिखते जुनूनी देश के हवाले अपनी वह विशिष्ट पनडुब्बी कर रहा है, जिसके जरिये परमाणु हमला किया जा सकता है।

ग्रास अपनी कविता में ईरान और इजरायल की जनता से आणविक कार्यक्रमों की मंशा को लेकर अपनी-अपनी सरकारों से साफ-साफ बात करने का आह्वान भी करते हैं। ग्रास ने इस कविता से न सिर्फ अपने देश को यहूदी मोहवाद और ऐतिहासिक अपराध बोध के पैमाने की आज के संदर्भो में परख करने की सलाह दी है, बल्कि चाहे-अनचाहे वह खुद को नात्सी दौर का हिस्सा बने रहने के आरोपों के प्रेत से भी पीछा छुड़ाना चाहते हैं।

ग्रास की यह कविता साहित्यिक हलकों से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय सामरिकता और ईरान विरोधी पश्चिमी एजेंडे की राजनीतिक वास्तविकताओं पर नई बहस की तरह सामने आई है। इस कविता के चर्चा में आने के बाद इजरायल ने एक ही झटके में ग्रास को हर तरह से अपने यहां प्रतिबंधित कर दिया है। उधर ईरान में ग्रास के लिए शुक्रिया का माहौल है। लेकिन ग्रास अपनी इस कविता में साफ कर चुके हैं कि इसे पक्षपाती न माना जाए, यह अपने बुनियादी स्वरों में विश्व शांति की तरफदार है और अंतरराष्ट्रीय नागरिकता की हिफाजत का बयान है।
(ये लेखक के अपने विचार हैं) 

 

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  • Web Title:इजरायल की जिद और गुंटर ग्रास का ‘बयान’