DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

न लिखने का मौसम क्यों नहीं आता

लेखकों से मुझे कोई खास शिकायत नहीं है, सिवाय इसके कि वे लिखते हैं। साक्षरता का एक खतरनाक पहलू यह है कि उससे आदमी लेखक हो सकता है। वैसे आजकल हिंदी में यह समस्या काफी कम हो गई है, लेखकों ने लिखना काफी कम कर दिया है। एक लेखक दूसरे से पूछता है- और क्या लिख रहे हो आजकल? दूसरा कहता है, ‘कुछ खास नहीं।’ तो पहला खुश हो जाता है कि इसका भी हाल मेरे जैसा है। इसके बावजूद माहौल अच्छा नहीं है, कई लेखक कभी-कभी कुछ लिख ही देते हैं।

लेखकों को करने के लिए काफी काम हैं, नौकरी तो है ही। मैंने सुना है कि कुछ लेखक सचमुच अपनी नौकरी में काम करते हैं। कुछ लेखक जो शिक्षक हैं, वे पढ़ाते हैं और कुछ अपने-अपने दफ्तरों में काम करते पाए जाते हैं। इसके अलावा सेमिनार, लोकार्पण वगैरह तो हैं ही, ये न हों, तो दोस्तों के साथ ‘बैठना’ भी एक काम है। पुराने जमाने में सुना जाता था कि लेखक कॉफी हाउस में बैठते थे और कॉफी पीते थे। अब ‘बैठने’ में शराब के अलावा किसी और पेय की जगह नहीं होती। उत्तर-उत्तर-उत्तर आधुनिक और अति-अति प्रगतिशील कवि भी कुछ पैग के बाद उस हालत में पहुंच जाता है, जैसे पुरानी हिंदी फिल्मों में शायर की भूमिका में नायक होते थे। इसके अलावा प्रेम करना, खासकर दूसरों की पत्नियों से एक काम है। पर मेरी शिकायत फिर वही है कि इन सबके बावजूद लेखक कभी-कभी लिखते भी हैं, न लिखें तो साहित्य की बड़ी सेवा हो। ताकि जिनका सम्मान समारोह हो, तो यह कहा जाए, ‘इन्होंने हिंदी साहित्य की बड़ी सेवा की, इन्होंने पंद्रह उपन्यास, बारह कविता संग्रह और दस आलोचना की वे किताबें नहीं लिखीं, जो वे लिख सकते थे। मैं यह आग्रह करूंगा कि उनके इस अवदान के लिए हर लाइब्रेरी में एक शेल्फ खाली रखा जाए।’

यह भी मन में आता है कि कुछ साहित्यिक पुरस्कार न लिखने के लिए हों। बस शर्त यह हो कि पुरस्कृत लेखक आइंदा कुछ नहीं लिखेगा। कुछ लोग यह मान सकते हैं कि मैं साहित्य विरोधी हूं, इसलिए ऐसा लिख रहा हूं। ऐसा नहीं है, मैं साहित्य-प्रेमी हूं और मेरा साहित्य-प्रेम ही मुझसे यह लिखवा रहा है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:न लिखने का मौसम क्यों नहीं आता