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गलती से हुनर तक

एक कहावत है कि मूर्ख और आलसी कभी गलती नहीं करते। एक के लिए गलती का कोई अस्तित्व नहीं होता और दूसरे के लिए काम का। ऐसे में, अगर हम खुद को औसत कर्मठ और औसत बुद्धिमान भी मानें, तो हमें गलतियों से कभी घबराना नहीं चाहिए। दुनिया में जितने भी महान लोग हुए हैं, उन सभी ने जमकर गलतियां की हैं, बस उन्हें दोहराया नहीं। गलतियों को न दोहराना सफलता का तयशुदा रास्ता है। ऐसा भी हो सकता है कि सफलता आपसे हजार गलतियां करने की कुर्बानी मांगे। अब ऐसे लोगों का क्या कीजिए, जो एक-दो गलती करके ही हिम्मत का बोरिया-बिस्तर समेट लेते हैं। मेरे एक सहकर्मी हैं, जो अपना प्रोजेक्ट पूरा करने में दो-तीन बार विफल रहे और फिर उन्होंने किस्मत को कोसना शुरू कर दिया। वे अब दार्शनिक की तरह बातें करते हैं और उनका एक तकिया कलाम है, ‘मेरी तो किस्मत ही खराब है।’ दूसरी ओर हर सफल व्यक्ति के लिए उनके पास एक ही टिप्पणी होती है, ‘अरे वह तो किस्मत का धनी है।’

दरअसल, उनकी सोच ने एक गलत दिशा पकड़ ली है। दर्शन हो या विज्ञान यह बात सदियों से कही जा रही है कि हर कार्य के पीछे एक कारण है। इसी सूत्र पर फोर्ड कंपनी के मालिक हेनरी फोर्ड ने कहा कि हर असफलता के पीछे एक गलती है, अगर इस गलती को सच्चे मन से माना जाए, तो अगली तय सफलता के पीछे भी यही गलती होगी। अब जरा सचिन तेंदुलकर की बात करें। वह महान हैं, क्योंकि हर उस बॉल पर, जिस पर उन्होंने गलती की और वह आउट हुए, अगले ही मैच में ठीक उस जैसी बॉल पर उन्होंने आसानी से रन बटोरे। ऐसा इसलिए हो पाया कि उन्होंने अपनी गलती को अपनाया, उसे जांचा-परखा और फिर उसे न दोहराने की जिद ठानी। यह परम सत्य याद रखिए- सफल वही हो सकते हैं, जिनमें नई-नई गलतियां करने और उनसे सीखने का हुनर है।

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