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राष्ट्रपति के जरिए राय लेगी सरकार

एक माह की हीला हवाली के बाद आखिर सरकार प्राकृतिक संसाधनों की बिक्री पर स्थिति स्पष्ट करने के लिए सुप्रीम कोर्ट को प्रेसिडेंशियल रिफरेंस (राष्ट्रपति का संदर्भ) भेजने पर राजी हो गई है। शीर्ष अदालत ने 2जी मामले में 122 लाइसेंस रद्द करने के साथ ही ‘पहले आओ, पहले पाओ’ की नीति को रद्द कर दिया था। इस कारण दुर्लभ प्राकृतिक संपदा को बेचने पर भ्रम की स्थिति बन गई है। राष्ट्रपति के जरिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से पूछा है कि इन संसाधनों को कैसे बेचा जाए?

प्रेसिडेंशियल रिफरेंस भेजने का फैसला मंगलवार देर रात कैबिनेट की बैठक में लिया गया। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने इसकी पुष्टि की। इसमें सरकार ने पूछा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट की यह व्यवस्था सभी प्राकृतिक संसाधनों के लिए है और इन संसाधनों को बेचने का एकमात्र तरीका क्या नीलामी है? यदि ऐसा है तो क्या शीर्ष अदालत का फैसला पिछली तारीखों से लागू होगा, जिसकी जद में 1994 तथा 2001 में दिए गए लाइसेंस भी आएंगे।

सरकार ने साफ किया है संदर्भ को 2जी फैसले का रिव्यू नहीं बल्कि स्पष्टीकरण मांगना माना जाए। सरकारका मानना है कि 2जी मामले पर आए फैसले का कई अन्य क्षेत्रों पर असर पड़ रहा है। क्योंकि वहां भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द नीति ‘पहले आओ पहले पाओ’ का अनुसरण किया जाता है।

2 मार्च को एक रिट याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने नौ टेलीकॉम कंपनियों को 2008 में मिले 2जी स्पेक्ट्रम के 122 लाइसेंस रद्द कर दिए थे। कोर्ट का कहना था आवंटन में ‘पहले आओ पहले पाओ’ की नीति अपनाई गई, जो गलत है। फैसले के खिलाफ कंपनियों तथा पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने रिव्यू याचिकाएं लगाईं, लेकिन कोर्ट ने पिछले हफ्ते उन्हें खारिज कर दिया। केंद्र सरकार की एक रिव्यू याचिका स्वीकार कर ली, जिसमें सरकार ने नीलामी करने की प्रक्रिया के बारे में स्पष्टीकरण मांगा है।

 

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