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दागियों और करोड़पतियों से गुलजार है एमसीडी का मैदान

भले ही दिल्ली नगर निगमों के प्रतिनिधियों को लोकसभा और विधानसभाओं के सदस्यों की तरह मोटा वेतन और आकर्षक भत्ते न मिलते हों, लेकिन बाहुबली और धनकुबेर यहां भी किस्मत आजमाने में पीछे नहीं हैं।

आम लोगों के हित की बात करनेवाले राजनीतिक दलों को भी ऐसे उम्मीदवार खूब भा रहे हैं। दिल्ली की तीन निगमों के चुनाव में उतरे 1485 उम्मीदवारों द्वारा दाखिल शपथ-पत्रों के विश्लेषण से पता चला है कि 139 उम्मीदवार दागी पृष्ठभूमि के हैं, जिनमें से 43 गंभीर किस्म के आरोप ङोल रहे हैं। वहीं 342 करोड़पति उम्मीदवार मैदान में हैं। चुनावों पर नजर रखनेवाली गैर सरकारी संस्थाओं- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म और नेशनल इलेक्शन वॉच की दिल्ली इकाई ने मंगलवार को इन उम्मीदवारों की सूची जारी की है। रिपोर्ट जारी करते हुए एडीआर के जगदीप छोकड़ और अनिल बैरवाल ने दिलचस्प तथ्य उजागर किया कि कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिनके पास संपत्ति तो करोड़ों में हैं लेकिन वार्षिक आय बिल्कुल नहीं है। कुछ की वार्षिक आय एक लाख तक है। कई करोड़पति उम्मीदवारों के पास पैन कार्ड तक नहीं है और कइयों ने कभी आयकर रिटर्न तक दाखिल नहीं किया है।

इस अवसर पर कॉमन कॉज के कमल जायसवाल ने निराशा जताई कि कांग्रेस और भाजपा जैसी जिम्मेदार पार्टियां आपराधिक छवि के उम्मीदवार उतारने में आगे हैं।

उन्होंने सवाल किया कि जब देश की जेलों में आधे से ज्यादा कैदी बिना किसी अदालती आरोप दायर किए बंद हैं तो ऐसे में इन दागियों को भी टिकट देने पर रोक लगाई जानी चाहिए। कॉमन कॉज ने इस आशय की याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर कर रखी है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की कार्यकारी निदेशक अनुपमा झा ने स्थानीय निकायों के प्रतिनिधियों को कोई वेतन न देने या मामूली वेतन का मुद्दा भी उठाया और उनके समुचित प्रशिक्षण की मांग की।

 

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