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खान-पान किसी औषधि से कम नहीं

जीवित रहने के लिए आहार एक आधारभूत आवश्यकता है। महर्षि चरक ने कई ऐसे पहलू स्पष्ट किए हैं, जो बताते हैं कि किस परिस्थिति में क्या खाने योग्य है अथवा नहीं। उनके अनुसार भोजन खाने योग्य है या नहीं, स्वास्थ्यवर्धक होगा या नहीं, इसके लिए भोजन की मात्रा, भोजन करने और पकाने की समयावधि, खाना पकाने की विधि आदि कई बातों की भूमिका होती है। आचार्य सुश्रुत चिकित्सा में विभिन्न प्रकार के आहार को उसके सकल मूल गुणों के आधार पर बांटा गया है-
1. शीत (ठंडा): इस किस्म के भोजन में ठंडा करने की प्रवृति होती है और यह उनके लिए अच्छा होता है, जो पित्त, गर्मी और हानिकारक रक्त वृद्घि से पीड़ित हैं। विषाक्तता से पीड़ितों को इसकी सलाह दी जाती है।
खाद्य पदार्थ: तरबूज, घीया, मूंग दाल और काली किशमिश।
2. उष्ण (गर्म): जो लोग वात और कफ दोष के रोगों से पीड़ित हैं, उन्हें इस तरह के आहार की सलाह दी जाती है। पूरा पेट साफ होने के बाद और उपवास आदि  के बाद इस तरह की चीजों का सेवन कम मात्रा में करने की सलाह दी जाती है। 
खाद्य पदार्थ: अदरक, अजवायन, काली मिर्च और अनन्नास।

3. स्निग्ध (कोमल और स्वाभाविक रूप से तैलाक्त): उचित मात्रा में इस किस्म के भोजन को ग्रहण करने से वात दोष को दबाया जा सकता है। शुष्क त्वचा, कमजोर या दुबलेपन से पीड़ितों के लिए इसका उपयोग लाभकारी होता है।
खाद्य पदार्थ: दही, केला, सेब, आम, गेंहू और उड़द दाल।

4. रूखा (शुष्क): कफ दोष को नियंत्रित करने में सहायक है। मोटेपन और तैलीय त्वचा वाले लोगों को इस आहार की सलाह दी जाती है।
खाद्य पदार्थ: नींबू, जामुन, शहद, काली मिर्च और सूखा अदरक।

5. द्रव्य (तरल या जल): यह आहार उन लोगों के लिए है, जो शरीर के भीतर रूखेपन से पीड़ित हैं, जिन्हें फोड़े, अल्सर या जोड़ों संबंधी समस्या होती है। उन्हें इस तरह के आहार को ग्रहण करना चाहिये।
खाद्य पदार्थ: पालक, सहजन की फली, काले अंगूर, तरबूज और नारियल पानी।

6. शुष्क (सूखा): कुष्ठ रोग, मधुमेह, त्वचा रोग या घावों से पीड़ितों को इसकी सलाह दी जाती है। 
खाद्य पदार्थ: जामुन, तरबूज, खरबूजे के बीज और कुल्थी दाल

7. हल्का भोजन: जिन लोगों को लिवर समस्या, बुखार या भूख नहीं लगती, उन्हें आसानी से पचने वाला भोजन ग्रहण करना चाहिये।
खाद्य पदार्थ: मूंग दाल व चावल की खिचड़ी, मांड, छाछ (दोपहर में)।

8. एक समय भोजन: जो लोग भूख की कमी या कमजोर पाचन तंत्र से पीड़ित हैं, उन्हें भूख और पाचन संबंधी विकारों को सामान्य होने के लिए एक बार भोजन करना चाहिए।
खाद्य पदार्थ: खिचड़ी के साथ सब्जियों का सूप (गाजर, घीया, पालक, कद्दू, सहजन की फली), दूध और घी।

9. दो बार आहार: सामान्यत: स्वस्थ लोगों को दिन में दो बार ही संपूर्ण भोजन लेना चाहिए। खाद्य पदार्थ: उपमा, दलिया, मूंग दाल, फल, हर्बल चाय, केला, नींबू का रस, संतरे का रस, दूध या सूप के साथ खिचड़ी, रात में मौसमी सब्जियां।

 

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