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अब होगी भविष्य निधि घोटाले की जांच

उत्तर प्रदेश में रमाबाई नगर (कानपुर देहात) के शिक्षण संस्थाओं के तृतीय श्रेणी कर्मचारियों के भविष्य निधि घोटाले की जांच केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से कराने का मंगलवार को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने निर्देश दिए।
 
न्यायालय ने सीबीआई से इसकी जांच कर आगामी 22 मई को जांच की प्रगति रिपोर्ट मांगा है। न्यायालय ने कहा है कि सीबीआई इस घोटाले के वास्तविक अपराधियों से सांठ गांठ कर उन्हें संरक्षण देने वाले पुलिस अधिकारियों की भूमिका की भी जांच करें।

यह आदेश न्यायमूर्ति सुधीर अग्रवाल ने गिरधारी लाल की याचिका पर दिया है। कोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव व डीजीपी उ.प्र.को भी निर्देश दिया है कि वे उन स्थानीय पुलिस के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई करे जिन्होंने घोटाले की जांच में प्रभावी कदम नही उठाया।

अदालत ने उच्च न्यायालय के महानिबंधक को भी कहा है कि आदेश की प्रति मुख्य सचिव व डीजीपी तथा निदेशक सीबीआई दिल्ली को आदेश के अनुपालनार्थ उपलब्ध कराए। न्यायालय के आदेश से एएसपी राकेश शंकर हाजिर हुए थे।

उन्होंने बताया कि 21 सितम्बर 2010 को घोटाले की प्राथमिकी दर्ज की गई है। अन्वेषण एक माह में पूरा कर लिया जाएगा। विवेचनाधिकारी ने बताया था कि दो लोगों सुरेन्द्र सिंह चपरासी व अनंत प्रताप सिंह क्लर्क के खिलाफ चार्जशीट दायर हो गई है। बडे लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नही हुई है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इस प्रकरण की सीबीआई से जांच का आदेश दिया है तथा मामले पर आगामी 22 मई को सुनवाई का निर्देश दिया है।

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