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संन्यास और बाजार

सचिन तेंदुलकर ने 25 मार्च को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और अपनी इच्छा जाहिर की कि वह अगले विश्व कप (2015) में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहते हैं। वैसे देखिए, तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं है। जिन भारतीय खिलाड़ियों ने व्यक्तिगत रूप अपने नाम सबसे ज्यादा रिकॉर्ड बनाए हैं, उनमें सचिन बेजोड़ हैं। वह क्रिकेट के ऐसे अकेले खिलाड़ी हैं, जिनके पास लगभग वे सारे रिकॉर्ड हैं, जो दुनिया में किसी भी क्रिकेटर के पास नहीं हैं, हालांकि इस रिकॉर्ड की कीमत देश को कई बार मैच हारकर चुकानी पड़ी है। सचिन को चाहने वाले लोग तरह-तरह के तर्क से लोगों को यह बताने में कामयाब हो जाते हैं कि सचिन जैसा महान खिलाड़ी जब तक खेलना चाहे, इस पर किसी को क्यों आपत्ति होनी चाहिए। पर सवाल कुछ और भी हैं। सचिन का जब 1989 में भारतीय क्रिकेट में पदार्पण हुआ, उस समय देश में उदारीकरण की सुगबुगाहट थी। क्रिकेट में तो उदारीकरण की पहली पैदाइश सचिन ही थे, जिसे हम ‘ब्रांड सचिन’ कह सकते हैं। वैसे तो, उस वक्त एक अन्य स्टार कपिल देव भी थे, लेकिन वह अपने कैरियर की ढलान पर थे, इसलिए उन्हें बाजार का इतना लाभ नहीं मिला। आकलन है कि आज सचिन की वार्षिक आय लगभग 400 करोड़ रुपये है। इसलिए यह अकारण नहीं हुआ है कि जब सचिन मुंबई में पूरी दुनिया के मीडिया के सामने अपने भविष्य की योजनाएं बता रहे थे, तो उनके बैकग्राउंड में उन सभी 17 ब्रांडों के लोगो लगे थे, जिनका वह विज्ञापन करते हैं।
जनपथ में जितेंद्र कुमार

 

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