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कला विषयों में कोर्स कॉम्बिनेशन यही है सही चॉइस

कला विषयों में कोर्स कॉम्बिनेशन यही है सही चॉइस

छात्र चाहे दसवीं के हों, बारहवीं के या फिर कॉलेज के, आज हर किसी को काउंसलिंग की जरूरत है। मेरे लिए दसवीं में कौन-सी स्ट्रीम बेहतर रहेगी, बारहवीं के बाद कौन-सा कोर्स मेरे लिए मुफीद है, कॉलेज के बाद मैं इसी कोर्स में पोस्ट-ग्रेजुएशन करूं या किसी दूसरे कोर्स का कॉम्बिनेशन मेरे लिए करियर के नए आयाम खोलेगा, ऐसे अनगिनत प्रश्न हैं, जिनके संभावित विकल्पों में आप डूबते-उतराते रहते हैं। माता-पिता और दोस्त आपको सलाह तो देते हैं, पर आप उससे संतुष्ट नहीं होते। काउंसलिंग आपको इसी उहापोह से उबारती है। इसलिए अगले तीन महीने हम चुनींदा काउंसलर्स की मदद से आपके जेहन में उमड़ते-घुमड़ते ऐसे असंख्य सवालों के जवाब देंगे।
चाहे तो कलम उठा हमें लिख भेजिए। हमारा पता है-काउंसलिंग, नई दिशाएं, हिन्दुस्तान, 18-20, कस्तूरबा गांधी मार्ग, नई दिल्ली या ईमेल करें naidishayen@livehindustan.com या फिर फेसबुक पर हमसे रूबरू हो जाइए। हमारा लिंक है- facebook/naidishayen(hindustan)

कला विषयों को लेकर यह धारणा बनी हुई है कि इनमें अच्छी नौकरियों के अवसर काफी कम हैं, लेकिन यह सच नहीं है। यदि आप ग्रेजुएशन के बाद परंपरागत पढ़ाई के बदले कॉम्बिनेशन कोर्सेज का चयन करें तो आप बेहतर नौकरी के सपने को साकार कर सकते हैं। इस बारे में विस्तार से बता रही हैं वंदना अग्रवाल 

स्नातक आपने किस विषय में किया है, जितना यह महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्वपूर्ण है कि स्नातक के बाद आप किस कोर्स में दाखिला ले रहे हैं। अक्‍सर छात्र स्नातक के बाद किसी भी प्रचलित कोर्स में दाखिला ले लेते हैं। कोर्स पूरा करने में पूरी शिद्दत से लगे रहते हैं, पर धक्का तब लगता है, जब वह कोर्स आपकी पेशेवर जिंदगी में काम नहीं आता। परिणामस्वरूप आप अपना पसंदीदा करियर नहीं चुन पाते।

झारखंड के मुकेश ने हिंदी ऑनर्स के बाद डिप्लोमा इन होटल मैनेजमेंट कोर्स में प्रवेश तो ले लिया और उसे पास भी कर लिया, पर जब रोजगार की तलाश में निकले तो कमजोर अंग्रेजी आड़े आने लगी। दरअसल इस क्षेत्र में सफलता के लिए अच्छी अंग्रेजी बोलनी आनी जरूरी है और मुकेश की अंग्रेजी बेहद खराब थी।

जेएनयू में हिंदी के असिस्टेंट प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा का कहना है कि यदि मुकेश होटल मैनेजमेंट की जगह सीधे-सीधे हिंदी भाषा से जुड़ा कोई कॉम्बिनेशन कोर्स करते तो उन्हें ज्यादा फायदा मिल सकता था। उनके लिए अध्यापन जैसा परंपरागत क्षेत्र ठीक था। हिंदी में मास्टर डिग्री करने के बाद वे पीएचडी या नेट पास कर विभिन्न संस्थानों में पढ़ा सकते थे। इसके अलावा मीडिया भी एक विकल्प हो सकता था। वे पत्रकारिता में मास्टर्स डिग्री कर किसी भी अखबार या चैनल से जुड़ सकते थे या फिर किसी भी कॉलेज में पत्रकारिता पढ़ा सकते थे। क्रिएटिव राइटिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग आदि भी अच्छे कॉम्बिनेशन कोर्स हैं। रचनात्मक सोच के साथ-साथ साहित्यिक अभिरुचि होती तो वे विभिन्न प्रकाशन संस्थानों में काम कर सकते थे। और तो और अखबारों के लिए भी फ्रीलांस कर सकते थे।

इंग्लिश
उत्तर प्रदेश के अरविंद ने अंग्रेजी में बीए ऑनर्स किया है। उनकी हिन्दी और अंग्रेजी, दोनों पर ही अच्छी पकड़ है। परिवार वाले चाहते हैं कि वे अंग्रेजी में ही एमए करें, पर अरविंद परंपरागत पढ़ाई न कर कोई ऐसा कोर्स करना चाहते हैं, जो भाषा से तो जुड़ा हो, पर कुछ अलग हो।

टीआईएमएसआर, मुंबई में असिस्टेंट प्रोफेसर सुशील कुमार पारे अरविंद को सलाह देते हैं कि उनके लिए करियर विकल्पों का भंडार है। मास्टर्स इन जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन करके वे अखबारों-न्यूज चैनलों में प्रवेश पा सकते हैं। यहां हिंदी और अंग्रेजी, दोनों में अच्छी पकड़ होने का फायदा उनको मिलेगा। इसके साथ वे अनुवाद में डिप्लोमा भी कर लें, क्योंकि एक पत्रकार को समय-समय पर अनुवादक की भूमिका में आना पड़ता है। इसके अलावा इंटरप्रेटर के रूप में भी काम किया जा सकता है। वे कॉरपोरेट कम्युनिकेशन से संबंधित कोर्स भी कर सकते हैं।

अर्थशास्त्र
डीयू के विजय ने अर्थशास्त्र में बीए ऑनर्स किया है। उनकी समस्या यह है कि बेहतर करियर के लिए उन्हें अब कौन सा कोर्स करना चाहिए।

स्नातक स्तर पर अर्थशास्त्र पढ़ने के बाद आप मास्टर ऑफ इंटरनेशनल बिजनेस या मास्टर ऑफ बिजनेस एंड इकोनॉमिक्स की पढ़ाई कर सकते हैं। इसके अलावा कई दूसरे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मौजूद हैं। इन क्षेत्रों में सभी प्रकार के वित्त बिजनेस एंटरप्राइजेज, प्रबंधन क्षेत्र, अर्थशास्त्र से जुड़े सरकारी विभाग, पब्लिक सेक्टर, यहां तक कि पत्रकारिता क्षेत्र भी  हैं। अगर आपने अर्थशास्त्र लेकर स्नातक किया है तो आप सिविल सर्विसेज की तैयारी कर सकते हैं। स्नातकोत्तर डिग्री के साथ एमफिल या पीएचडी करके अध्यापन क्षेत्र में भी आ सकते हैं।

इतिहास
इतिहास के विद्यार्थी सिविल सर्विसेज की तैयारी तो सालों से करते ही रहे हैं, पर आज इतिहास पढ़ कर आप टूरिस्ट गाइड, हैरिटेज टूर ऑपरेटर या टूर मैनेजर का कार्य कर सकते हैं। इतिहास की किताबें छापने वाले प्रकाशकों के साथ कंटेंट राइटर के रूप में जुड़ सकते हैं। ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर बनने वाले सीरियल और फिल्मों के लिए रिसर्च का काम कर सकते हैं। स्नातकोत्तर उपाधि लेने के बाद पीएचडी कर अध्यापन से जुड़ सकते हैं। इसमें रिसर्च की भी बहुत संभावनाएं हैं।

मनोविज्ञान
पुष्पा के पास बीए में मनोविज्ञान, अंग्रेजी और अर्थशास्त्र विषय हैं। वह मनोविज्ञान में करियर बनाना चाहती हैं और जानना चाहती हैं कि उन्हें कौन से कोर्स करने चाहिए?

मनोविज्ञान के स्नातक के लिए सबसे पहले मनोविज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री करना बेहतर होता है। आप चाहें तो गाइडेंस और काउंसलिंग में पीजी डिप्लोमा कर सकते हैं। मनोविज्ञान की पढ़ाई करने के बाद किसी स्कूल में चाइल्ड काउंसलर के रूप में कार्य कर सकते हैं। हॉस्पिटल्स, मेडिकल स्कूल, रिहेबिलीटेशन सेंटर, पब्लिक हेल्थ एजेंसी, औद्योगिक संस्थानों से काउंसलर के रूप में जुड़ सकते हैं। इसके अलावा स्कूलों में पढ़ा सकते हैं। सरकारी और निजी संस्थानों के लिए रिसर्च वर्क कर सकते हैं। काउंसलर के रूप में प्राइवेट प्रेक्टिस कर सकते हैं।

भूगोल
अदिति ने बीए में भूगोल विषय पढ़ा है। वह जानना चाहती है कि उसे आगे क्या लेना चाहिए। भूगोल में स्नातक कर चुके छात्रों के लिए भूगोल में स्नातकोत्तर डिग्री लेना ठीक रहता है। स्नातकोत्तर के बाद आप काटरेग्राफी में डिप्लोमा कर सकते हैं या टूर एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर डिग्री ले सकते हैं। भूगोल की पढ़ाई प्रतियोगी परीक्षाओं में भी मददगार साबित होती है।

भोपाल के कबीर के पास बीए में समाजशास्त्र, पॉलिटिकल साइंस एवं हिंदी विषय थे। उन्हें लोगों से मिलना, उनकी मदद करना पसंद है। जानना चाहते हैं कि आगे उन्हें कौन-सा कोर्स करना चाहिए।

आप मास्टर्स इन सोशल वर्क कर सकते हैं। सोशल वर्क में रिसर्च प्रोजेक्ट कर सकते हैं। किसी एनजीओ के साथ जुड़ सकते हैं। अपना एनजीओ खोल सकते हैं। सोशल वर्क में मास्टर डिग्री के बाद पीएचडी या एमफिल करके अध्यापन कर सकते हैं। समाज सेवक के रूप में सामाजिक विसंगतियों को दूर करने एवं लोगों को जागरूक बनाने की दिशा में कार्य कर सकते हैं।
(यह लेख जेएनयू में हिंदी के सहायक प्रोफेसर गंगा सहाय मीणा एवं टीआईएमएसआर में असिस्टेंट प्रोफेसर सुशील कुमार पारे से बातचीत पर आधारित है।)

कोर्स चुनते समय दें ध्यान

व्यक्तित्व को परखें
स्नातक के बाद किए जाने वाले कोर्सों में अनेक ऐसे हैं, जो किसी भी विषय में स्नातक पास छात्र कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी कोर्स को चुनने से पहले अपने व्यक्तित्व के गुणों पर ध्यान दें। जैसे अगर आपको लोगों से मिलने-जुलने का शौक है, हरदम कुछ नया करना, खतरों से खेलना आपका मिजाज है, तभी आप मीडिया में आएं। इस क्षेत्र में आपको हर दिन परफॉर्म करना होता है।

इंटर्नशिप को हल्के में न लें
किसी भी प्रोफेशनल कोर्स के बाद कुछ दिनों की इंटर्नशिप कराई जाती है। इसका मकसद छात्र को प्रोफेशन के प्रयोगात्मक पक्ष से रूबरू कराना होता है। पर अकसर छात्र इंटर्न के दौरान सही तरह से प्रेक्टिकल वर्क करने की बजाय सिर्फ सर्टिफिकेट जुगाड़ने में लगे रहते हैं। ऐसा न करें। इसमें आपका ही नुकसान है। इंटर्न अवधि को उस प्रोफेशन के प्रयोगात्मक पक्ष को समझने में इस्तेमाल करें। इसी पर भविष्य की आधारशिला टिकी है।

प्रोफेशनल डिग्री के साथ जुड़े हैं कई कॉम्बिनेशन
स्नातक के बाद आप जो भी प्रोफेशनल कोर्स करते हैं, उसे करने के बाद भी कुछ अन्य कम अवधि के कोर्स करके अपनी दक्षता बढ़ा सकते हैं। जैसे अगर आपने एमजेएमसी किया है तो अनुवाद में डिप्लोमा कर सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में जाना चाहते हैं तो एंकरिंग एवं न्यूज रीडिंग का कोर्स कर सकते हैं।

वर्कशॉप है काम की
विभिन्न कॉलेजों, विश्वविद्यालयों में समय-समय पर अलग-अलग विषयों पर वर्कशॉप एवं ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित होते हैं। कोर्स के दौरान आप अपने कोर्स से संबंधित वर्कशॉप एवं ट्रेनिंग प्रोग्राम में जरूर हिस्सा लें। इससे आपकी दक्षता तो बढ़ेगी ही, संबंधित प्रोफेशन के विशेषज्ञों से भी आपकी मुलाकात होगी। उनसे सवाल कर आप अपनी जिज्ञासाओं को शांत कर सकते हैं।

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