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व्हेल की पीठ पर करो समुद्र की सैर

व्हेल की पीठ पर करो समुद्र की सैर

तुम्हें मछलियों से कितना प्यार है! जानते हो, एक ऐसी भी मछली है, जो काफी दोस्ताना व्यवहार करती है और लोगों के साथ जमकर अटखेलियां भी करती है। इस मछली का नाम है व्हेल शार्क। यह व्हेल प्रजाति की मछली है। इसमें कई तरह की खासियतें हैं। व्हेल शार्क के बारे में तुम्हें बता रहे हैं प्रसन्न प्रांजल

करती है दोस्ताना व्यवहार
मछलियों की प्रजाति में एक मछली है व्हेल शार्क। यह स्वभाव से काफी सीधी होती है, साथ ही यह दोस्ताना व्यवहार भी करती है। इसी वजह से लोग इसके साथ शौक से तैराकी करते हैं। तैराकी के दौरान इसके पंखों पर भी बैठ सकते हैं और यह बिना कोई नुकसान पहुंचाए मीलों तक घुमा सकती है। जब ये तैर रही होती है, तो इसके आस-पास कई अन्य छोटी-छोटी मछलियों का जमावड़ा होता है।

सफाई पसंद है इसे
जैसे साफ-सफाई तुम्हें पसंद है, वैसे ही इस मछली को भी साफ-सफाई बेहद पसंद है। ये मछली समुद्र में फैले हुए छोटे-छोटे पेड़-पौधों और वनस्पतियों को खाती है और वहां की गंदगियों को भी साफ करती है। यह
छोटी मछलियों को भी खाती है। अपने बड़े से मुंह को जब यह कुछ खाने के लिए खोलती
है तो आस-पास मौजूद अनगिनत छोटी मछलियां एक पल में ही इसके पेट में होती हैं। पेड़-पौधे और वनस्पतियों को खाने और गंदगी को समाप्त करने से समुद्र में फैली हुई वनस्पतियों की संख्या नियंत्रित रहती है और समुद्र भी साफ रहता है।

कितनी हकीकत कितना फसाना
व्हेल शार्क को लेकर अलग-अलग देशों में अलग-अलग तरह की मान्यताएं हैं। व्हेल शार्क को जापान में लोग शुभ मानते हैं, इसलिए जापानी मछुआरे इस बात का खासा ख्याल रखते हैं कि ये उनके जहाजों से न टकराएं। वियतनाम के मछुआरे इसे सर फिश कहते हैं। वहां के मछुआरों का मानना है कि व्हेल मछलियां समुद्री आंधी, तूफान में उनके सुरक्षित रहने की दुआ करती हैं।

इनके ठिकाने
व्हेल शार्क अफ्रीका, एशिया, ऑस्ट्रेलिया, ग्रेट बैरियर रीफ, साउथ अमेरिका में पाई जाती हैं। इसके अलावा ये अपने प्रवास के दौरान निन्गालो रीफ पर भी जाती हैं। मार्च-अप्रैल के दिनों वहां छोटी-छोटी असंख्य मछलियां तैर रही होती हैं, जो इन्हें भोजन के लिए आकर्षित करती हैं।

अस्तित्व पर संकट
बढ़ते शिकार के कारण मछुआरों द्वारा व्हेल शार्क मार दी जाती हैं। इसी वजह से इनकी संख्या काफी तेजी से घट रही है। विश्व के दुर्लभ व विलुप्त हो रहे प्राणियों के संरक्षण के लिए काम करने वाली संस्था वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फंड ने इस बड़ी मछली की प्रजाति को विलुप्त होने के कगार के प्राणियों की श्रेणी में रखा है।

ये भी जान लो
हाल ही में पाकिस्तानी समुद्री तट के किनारे शार्क व्हेल मरी हुई मिली थी। यह अभी तक की दुनिया की सबसे बड़ी मछली थी। इसकी लम्बाई करीब 40 फुट के आस-पास थी। इसका वजन इतना अधिक था कि इसे उठाने के लिए तीन क्रेनों की मदद ली गई। तीन-तीन क्रेनों से उठाए जाने के बाद इसका नाप लिया गया और फिर इसकी नीलामी की गई। नीलामी के दौरान बड़ी-बड़ी बोलियां लगाई गईं। टीवी पर इसका सीधा प्रसारण भी किया गया। ये व्हेल 1.7 मिलियन पाकिस्तानी रुपए में खरीदी गई।

रंग-रूप और बनावट
इसकी पहचान छोटे-छोटे नुकीले 4 हजार दांतों की श्रृंखला से होती है। यह समुद्र की सतह पर तैरती है और गहराई में नहीं जाती।

इसका पेट सफेद और पीठ हल्की भूरी या फिर नीली होती है। आंखें छोटी होती हैं और सिर की सतह से पीछे की ओर स्थित होती हैं। ये मछलियां गर्म पानी में रहती हैं। इनकी आयु औसतन 60 से 70 साल तक बताई जाती है। 27 फुट के होने के बाद ही ये परिपक्व समङी जाती हैं। व्हेल शार्क बुद्धिमान और शांत होती हैं।
व्हेल शार्क आकार में 50 फुट तक होती है और इसका वजन 20 टन से लेकर 50 टन तक के बीच होता है।

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