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बिहार विधान परिषद में दिखेंगे ज्यादातर पुराने चेहरे

बिहार में रिक्त हो रही विधान परिषद की 11 सीटों के लिए वैसे तो 26 अप्रैल को चुनाव होना है लेकिन इसके लिए अभी से सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सत्तारूढ़ दल जनता दल (युनाइटेड) द्वारा पुराने लोगों को ही मैदान में उतारे जाने की घोषणा के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए नेता भी भयभीत हैं। वैसे राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का नाम तय कर दिया है।

अगले महीने के पहले सप्ताह में बिहार की विधान परिषद की 11 सीटें रिक्त हो रही हैं। बिहार में जो सीटें खाली हो रही हैं उनमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ कई मंत्री भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि बिहार में सतारूढ़ जद (यू) और भाजपा के दोनों शीर्ष नेताओं क्रमश: नीतीश और मोदी का विधान परिषद में एक बार फिर पहुंचना तय है। इसके अलावा भाजपा कोटे से ताराकांत झा और बालेश्वर सिंह का कार्यकाल पूरा हो रहा है।

इधर, भाजपा के एक नेता की मानें तो कई भाजपा नेता विधान परिषद की सदस्यता पर नजर टिकाए हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सी पी ठाकुर के पुत्र विवेक ठाकुर को टिकट नहीं दिए जाने से वह नाराज हो गए थे, तब शीर्ष नेताओं के पुत्रों को विधान परिषद भेजे जाने का आश्वासन दिए जाने के बाद मामला शांत हुआ था। इस कारण विवेक भी इस दौड़ की अग्रिम पंक्ति के खिलाड़ी माने जा रहे हैं।

सीपी ठाकुर कहते हैं कि विधान परिषद में जाने को इच्छुक उम्मीदवारों के नाम पर दिल्ली में चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि विधान परिषद में इस बार भाजपा चार उम्मीदवार चुनाव में उतारने वाली है। उन्होंने कहा कि एक-दो दिनों में सभी उम्मीदवारों की सूची सामने आने की संभावना है। इधर, सूत्र बताते हैं कि राज्य के कई नेता दिल्ली में अपने दलीय आकाओं के यहां लॉबिंग कर रहे हैं। 

उधर, जद (यू) ने अपने पुराने उम्मीदवारों को ही उतारने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कर दिया है कि जद (यू) में विधान परिषद के लिए कोई रिक्ति नहीं है, इसलिए यह तय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री के अलावा विधान परिषद में सत्तापक्ष के उपनेता रामाश्रय प्रसाद सिंह, कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह, ग्रामीण विकास मंत्री भीम सिंह, संजय सिंह और उपेंद्र प्रसाद एक बार फिर विधान परिषद जाएंगे।

राजद ने पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को विधान परिषद भेजना तय कर लिया है। राबड़ी 11 अप्रैल को पर्चा दाखिल करेंगी। विधानसभा में राजद की स्थिति को देखा जाए तो राबड़ी का विधान परिषद में जाना तय है।

राजद के प्रदेश महासचिव राजीव सिंह कहते हैं कि बहुत दिन से राजद के लोग एक अभिभावक की कमी महसूस कर रहे थे जिस कारण रविवार को राजद विधायक दल ने राबड़ी देवी की उम्मीदवारी का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित कर दिया।

उल्लेखनीय है कि बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। 243 विधानसभा सीटों वाली बिहार विधानसभा में जद (यू) के सर्वाधिक 115 सदस्य हैं जबकि भाजपा के 91 सदस्य और राजद के 22 सदस्य हैं।

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