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स्वतंत्र आयोग करे बीपीएल का चयन : नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि केन्द्र द्वारा सामाजिक, आर्थिक और जातीय सर्वेक्षण की मौजूदा प्रक्रिया में कई तरह की खामियां हैं। इस आधार पर बीपीएल सूची का विवाद नहीं थमने वाला। केन्द्र को स्वतंत्र राष्ट्रीय आयोग के माध्यम से बीपीएल परिवारों का चयन करना चाहिए। तभी केन्द्र और राज्य में टकराव नहीं होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक और जातीय सर्वेक्षण के लिए कर्मचारी घर घर जाकर आंकड़े संग्रह करेंगे लेकिन सूचना दर्ज कराने वालों को उसकी प्रति नहीं मिलेगी। अब किसकी जाति क्या दर्ज हुई और उसके बारे में कौन सी सूचनाएं संग्रहित की गयी, इसका संबंधित व्यक्ति को पता भी नहीं चलेगा। इसलिए हमने सूचनाओं की एक प्रति लाभार्थी को देने की मांग की थी लेकिन केन्द्र में बैठे लोग मानते ही नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीपीएल सूची का निर्माण चुनाव आयोग की तरह किसी स्वतंत्र संस्था से द्वारा कराए जाने पर राज्य सरकारें सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों की संख्या को लेकर केन्द्र पर दोषारोपण नहीं कर सकेंगी। इससे इससे लोगों की शिकवा शिकायतें दूर होंगी। विभिन्न प्रकार की सामाजिक योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान करने में भी मदद मिलेगी।

केन्द्र सामाजिक आर्थिक गणना के साथ जातिगत सव्रेक्षण भी करा रहा है लेकिन यह काम अंतत: राज्य का तंत्र करेगा। इसमें कई प्रकार की त्रुटियां हो सकती हैं। बाद में दस तरह के सवाल भी उठेंगे। इस बाबत मैंने केन्द्रीय ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश से बात की है। बिहार सरकार ने तीन बार बीपीएल सूची तैयार कराई। फिर भी कई लोग छूट गये।

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