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अब छोटे और मध्यम शहरों पर फोकस

राज्य के ज्यादातर छोटे और मध्यम शहर बदहाल हैं। इन शहरों की सूरत बदलने की घोषणाएं होती रही हैं, लेकिन नतीजा सिफर रहा है। अब इन शहरों के कायाकल्प की योजनाओं पर एक बार फिर नगर विकास विभाग ने काम प्रारंभ किया है।

ऐसे शहरों में नागरिक सुविधाओं के विकास के साथ-साथ आधारभूत संरचनाओं के विकास पर काम होंगे। इनमें सड़कों के निर्माण से लेकर शहरों को सुव्यवस्थित तक के कार्यक्रम शामिल हैं। इसके लिए केन्द्र के सहयोग से पहले चरण में 134 करोड़ रुपए की योजना बनाई गई है। केन्द्र सरकार 106 करोड़ रुपए देगी। यह राशि और बढ़ेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट ऑफ स्मॉल एंड मिडियम टाउन्स (यूआईडीएसएमटी) में 11 छोटे व मध्यम शहरों का चयन किया गया है। इनमें फतुहा, मुरलीगंज, नरकटियागंज, रोसड़ा, बरबीघा, भभुआ, बख्तियारपुर, लालगंज, चकिया के अलावा मुजफ्फरपुर व आरा को शामिल किया गया है। इनके विकास की विस्तृत योजना बनाई गई है। इसमें सड़क, सिवरेज, गलियों का विकास, पेयजल आपूर्ति आदि योजनाएं हैं। इनमें मुजफ्फरपुर नगर निकाय में जलापूर्ति एवं आरा नगर निगम में ठोस अवशिष्ट परियोजना विशेष रूप से कार्यान्वित हो रही हैं।

मुरलीगंज, नरकटियागंज, रोसड़ा, बख्तियारपुर, मुजफ्फरपुर व आरा की योजना बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम लि. (बुडको) द्वारा व शेष परियोजनाएं नगर निकायों द्वारा संचालित हो रही हैं।

इस समय सूबे के छोटे व मध्यम शहरों में नागरिक सुविधाओं का घोर अभाव है। न ढंग की सड़कें हैं और न कोई बुनियादी सुविधाएं। गलियों तक की स्थिति बदतर है। जगह-जगह सड़कें अतिक्रमित हैं। विभाग इन समस्याओं के मद्देनजर व्यापक योजनाएं बना रहा है। पहले चरण में बुनियादी सुविधाओं के विकास के बाद दूसरे चरण में अन्य समस्याओं का निराकरण होगा।
 
राज्य के छोटे व मध्यम श्रेणी के शहर उपेक्षित नहीं रहेंगे। बड़े शहरों के साथ ही उनके विकास की योजना पर काम हो रहा है। सरकार हर नागरिक को नागरिक सुविधा मुहैया कराने के लिए संकल्पित है।
-डॉ. प्रेम कुमार, नगर विकास व आवास मंत्री

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