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13 को राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाएगी सीपीआई

सीपीआई बिजली बोर्ड के विखंडन और बिजली दर में वृद्धि के खिलाफ 13 अप्रैल को राज्यव्यापी विरोध दिवस मनाएगी। पार्टी आम जनता, बिजली उपभोक्ता और किसान सभा के साथ राज्य के कोने-कोने में राज्य सरकार और बिजली बोर्ड का पुतला दहन करेगी। रविवार को सीपीआई की राज्य कार्यकारिणी की विस्तारित बैठक में यह निर्णय किया गया।

बैठक में बिजली बोर्ड के विखंडन और बिजली दर में वृद्धि के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया। पार्टी का राज्य सम्मेलन मुजफ्फरपुर में 4 से 7 जून के बीच करने का भी फैसला हुआ। कामरेड यूएन मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी जिलों के पार्टी सचिव शामिल हुए।

इस अवसर पर राज्य सरकार की जनविरोधी बिजली नीति के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ। नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें किसानों और गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को रियायती दर पर बिजली आपूर्ति की व्यवस्था करने में विफल हो गईं है। बिहार और झारखंड को छोड़कर सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बिजली बोर्डो को समाप्त किया जा चुका है।

ओड़िशा और दिल्ली में तो वितरण व्यवस्था को पूरी तरह निजी क्षेत्रो को सौंपा जा चुका है। इस व्यवस्था का गंभीर अध्ययन किये बिना और परिणाम प्रतिकूल होने के बावजूद बिहार सरकार ने पांच कंपनियों में विद्युत बोर्ड का विखंडन करने का फैसला कर लिया है। हालांकि कामगारों के प्रतिरोध के कारण निजीकरण की गति धीमी है।

दूसरी तरफ, इंधन अधिभार समेत कई कारणों के नाम पर सरकार बिजली आपूर्ति की दर में लगातार वृद्धि कर रही है। इसके खिलाफ आम उपभोक्ताओं ने भी 12 अप्रैल को पटना बंद का आह्वान किया है। इस अवसर पर वरीय कामरेड प्रमोद गोगोई और सीके चंद्रप्पन के निधन पर शोक व्यक्त किया गया।

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